
10 दिसंबर, विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
कुशीनगर जनपद में पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन को लेकर चल रही सख्त निगरानी एक बार फिर बड़े खुलासे के साथ सामने आई है। ग्राम पंचायत विशुनपुरा बुजुर्ग, विकास खंड खड्डा में वर्ष 2017-18 की लेखा परीक्षा में सामने आए ₹1 लाख के दुरूपयोग ने पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला लेखा परीक्षा अधिकारी द्वारा प्रस्तुत अधिभार प्रतिवेदन में यह साफ तौर पर साबित हुआ कि पंचायत निधि के उपयोग में गड़बड़ी की गई और सरकारी धन का अपव्यय बिना किसी ठोस दस्तावेज के दिखा दिया गया।
अधिकारियों द्वारा किए गए विस्तृत परीक्षण में यह तथ्य सामने आया कि प्राथमिक विद्यालय में फर्श मरम्मत, रंगाई–पुताई और गेट निर्माण के नाम पर 28 फरवरी 2018 को पूरे ₹1,00,000 का खर्च दिखाया गया, लेकिन इस भारी-भरकम भुगतान के समर्थन में न तो बिल, न खरीद दस्तावेज, न दरें, न मस्टररोल, न कार्य प्रमाणपत्र और न ही स्वीकृतियाँ प्रस्तुत की गईं। यानी लाख रुपए का भुगतान पूरी तरह कागज़ी खेल साबित हुआ।
इस गंभीर प्रकरण पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने तत्कालीन ग्राम प्रधान श्रीमती रूखसाना एवं ग्राम पंचायत सचिव राजेश यादव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा था। दोनों ने अपनी-अपनी आख्या प्रस्तुत की, लेकिन जिला लेखा परीक्षा अधिकारी द्वारा 10-11-2025 को जारी जांच रिपोर्ट में उनकी बातें पूरी तरह असंतोषजनक और तथ्यहीन पाई गईं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट महेन्द्र सिंह तंवर ने कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा–27 एवं नियम 257 के तहत तत्कालीन ग्राम प्रधान से ₹50,000 की वसूली का आदेश जारी किया है। यह राशि दुरुपयोग की गई कुल धनराशि का आधा हिस्सा है, जिसे डीएम ने व्यक्तिगत उत्तरदायित्व मानते हुए वसूल किए जाने योग्य बताया है।
डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि निर्धारित 50 हज़ार रुपये अधिकतम 03 माह के भीतर ग्राम निधि प्रथम खाता संख्या–1777000100090907, पंजाब नेशनल बैंक शाखा सोहरौना में जमा किए जाएँ। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि तय अवधि में राशि जमा न होने की स्थिति में इसे माल-गुजारी बकाये की तरह जबरन वसूला जाएगा।
यह कार्रवाई न केवल पंचायत स्तर पर व्याप्त लापरवाही और वित्तीय अनियमितता पर बड़ा सवालिया निशान है, बल्कि जिलेभर की ग्राम पंचायतों को भी एक स्पष्ट संदेश देती है कि विकास कार्यों में धोखाधड़ी, हेराफेरी या अपव्यय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुशीनगर प्रशासन की यह सख्ती अब अन्य पंचायतों के लिए भी चेतावनी की घंटी मानी जा रही है।
