

विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
दिनांक : 13 दिसम्बर 2025
कुशीनगर जनपद में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन न्यायिक इतिहास में एक नई मिसाल बनकर उभरा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कुशीनगर के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत में कुल 1,23,205 वादों का त्वरित, सरल एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण कर आमजन को बड़ी राहत प्रदान की गई।
कार्यक्रम का भव्य शुभारम्भ संजीव कुमार त्यागी, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुलाब सिंह, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय एवं प्रेम कुमार राय, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं वादकारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा प्रदान की।
लोक अदालत में न्यायिक तत्परता और मानवीय संवेदना का अनूठा संगम देखने को मिला। 10, 11 एवं 12 दिसम्बर 2025 को आयोजित विशेष लोक अदालतों में 735 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण किया गया, जबकि 13 दिसम्बर को मुख्य राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,22,470 वादों का समाधान किया गया। इस प्रकार कुल मिलाकर 1,23,205 वादों का निस्तारण हुआ।
फौजदारी मामलों में 9,058 वादों का निस्तारण कर ₹1,52,020 की जुर्माना राशि राजकीय कोष में जमा कराई गई। वहीं, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से जुड़े 94 मामलों में मृतकों एवं घायलों के परिजनों को ₹6.77 करोड़ से अधिक का मुआवजा दिलवाकर न्याय प्रणाली की मानवीय भूमिका को सशक्त रूप से स्थापित किया गया।
परिवार न्यायालयों द्वारा 73 पारिवारिक विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान किया गया, जिससे टूटते रिश्तों को नया जीवन मिला। बैंक ऋण मामलों में प्री-लिटिगेशन स्तर पर 1,743 मामलों का निस्तारण करते हुए बैंकों द्वारा ₹9.29 करोड़ से अधिक की टोकन मनी की वसूली की गई। इसके अतिरिक्त 1,126 राजस्व वादों का भी समाधान हुआ।
इस अवसर पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश, सिविल जज, न्यायिक मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि न्याय केवल फैसला नहीं, बल्कि समाधान है। कुशीनगर में आयोजित यह लोक अदालत न्यायिक व्यवस्था की प्रभावशीलता, पारदर्शिता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गई।




