
सांस्कृतिक भावनाओं से भरी रिपोर्ट, जो रामपुर राजा कुशीनगर तमकुही राज से अमित कुशवाहा की खास रिपोर्ट लाईव न्यूज़
छठ घाट पर आस्था, अनुशासन और सेवा का संगम 🙏रामपुर राजा घाट से LIVE दृश्य —पूर्व मंत्री शैलेंद्र पांडे खुद मैदान में, व्यवस्था पर सख्त निगरानी।
कुशीनगर/तमकुहीराज:
सूर्य उपासना और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का अंतिम दिन — आस्था, अनुशासन और श्रद्धा का संगम बना हुआ है।
कुशीनगर जनपद के रामपुर राजा छठ घाट पर आज सुबह व्रती माताओं और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। नदी किनारे गूंजते छठ मैया के गीतों और ढोलक की थाप के बीच जब पूर्व मंत्री श्री शैलेंद्र पांडे स्वयं घाट पर पहुँचे तो श्रद्धालुओं में उत्साह और भरोसा दोनों बढ़ गया।
पूर्व मंत्री ने घाट की पूरी व्यवस्था का स्वयं निरीक्षण किया, लोगों से हालचाल लिया, और सुरक्षा व साफ-सफाई पर विशेष निगरानी बनाए रखी। उनके साथ स्थानीय कार्यकर्ता — अमोद पांडे, आकाश तिवारी, बजेंद्र पांडे, जयप्रकाश कुशवाहा समेत भाजपा के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
उन्होंने अधिकारियों और नगर पंचायत कर्मियों को निर्देश दिए कि कोई भी श्रद्धालु असुविधा में न पड़े, और घाट पर पर्याप्त प्रकाश व सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।
घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने का दृश्य भावनाओं से भर देने वाला था। व्रती महिलाओं ने मिट्टी के पात्रों में दीप सजाए, बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, और सिंघाड़े से भरे दूर्वा-गंधयुक्त अर्घ्य से सूर्य देव को नमन किया।
चारों ओर “जय छठी मइया” के जयकारे, लोकगीतों की गूंज और गंगाजल से भरे कलशों की चमक — सब मिलकर इस सुबह को आध्यात्मिक बना रहे थे।
पूर्व मंत्री शैलेंद्र पांडे ने कहा कि
“छठ केवल पूजा नहीं, बल्कि लोक आस्था, अनुशासन और स्वच्छता का सबसे बड़ा पर्व है। यह हमारी संस्कृति की पहचान है, और इसे व्यवस्थित रूप से संपन्न कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस व नगर पंचायत की टीमों ने इस बार घाटों पर उत्कृष्ट समन्वय दिखाया है।
घाट पर महिला पुलिस बल की तैनाती, गोताखोरों की उपस्थिति और मेडिकल टीम की व्यवस्था भी देखने को मिली।
रामपुर राजा घाट के अलावा तमकुहीराज, पडरौना और कसया क्षेत्र के अन्य घाटों पर भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। सुबह की पहली किरण के साथ जैसे ही व्रतियों ने अर्घ्य दिया, पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब गया।
बच्चे, युवा, बुजुर्ग — हर कोई इस पारंपरिक उत्सव का हिस्सा बना।
इस दौरान घाट पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं को प्रसाद व जल वितरित किया।
सांझेपन और सेवा की मिसाल पेश करते हुए कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने सफाई अभियान चलाया, जिससे घाट पूरी तरह स्वच्छ और सुरक्षित बना रहा।
कुशीनगर के घाटों पर उमड़ी यह आस्था की भीड़ यह संदेश दे रही है कि परंपरा चाहे कितनी भी पुरानी हो, जब समाज एकजुट होता है, तो हर पर्व नई ऊर्जा लेकर आता है।
छठ की इस पावन बेला पर सूर्य की पहली किरण के साथ ही पूरा कुशीनगर आस्था, प्रकाश और उम्मीद के रंगों में रंग उठा।

