
18 दिसम्बर | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
जनपद कुशीनगर में बढ़ती शीतलहर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के कड़े निर्देशों के क्रम में जनपद भर में रैनबसेरों, अलाव व्यवस्था एवं गौशालाओं की सघन जांच कराई गई। प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि शीतलहर के दौरान कोई भी व्यक्ति सड़क पर सोता हुआ नहीं मिलना चाहिए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जाएगी।
जनपद के कुल 13 नगर निकायों में संचालित 15 रैनबसेरों का औचक निरीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि सभी 15 रैनबसेरे सक्रिय हैं, जहां बीती रात कुल 32 निराश्रित एवं जरूरतमंद लोग सुरक्षित रूप से ठहरे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि रैनबसेरों में महिला एवं पुरुषों के लिए पृथक ठहराव, स्वच्छ शौचालय, स्नानागार, क्लोरीनयुक्त पेयजल, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, महिला-बालिका सुरक्षा, पर्याप्त कंबल, गद्दे व बिस्तर जैसी सभी आधारभूत सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध रहें। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शीतलहर से राहत पहुंचाने के लिए जनपद के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, प्रमुख चौराहों व सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। अधिशासी अधिकारियों एवं उपजिलाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि अलाव की व्यवस्था नियमित रूप से संचालित रहे और किसी भी स्थान पर ठंड से कोई जनहानि न हो।
इसके साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कंबल वितरण अभियान तेज कर दिया गया है। अब तक तहसील पडरौना में 125 एवं तहसील कप्तानगंज में 08 कंबलों का वितरण किया जा चुका है। जरूरतमंदों को प्राथमिकता के आधार पर कंबल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने दो टूक कहा कि शीतलहर में राहत व्यवस्था प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि रात में भी भ्रमण कर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी असहाय व्यक्ति खुले में न रहे। जिला प्रशासन की यह सख्ती साफ संदेश देती है कि कुशीनगर में ठंड से जूझते गरीब, बेसहारा और निराश्रितों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।



