
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
कुशीनगर जनपद के नगर पंचायत दुदही में स्थित खैरवा घाट आज भी बदहाली, उपेक्षा और सरकारी लापरवाही की मार झेल रहा है। यह वही घाट है जहां नगर पंचायत दुदही के गठन से कई दशक पहले से मृतकों का अंतिम संस्कार होता चला आ रहा है। सिर्फ दुदही ही नहीं, बल्कि करीब दर्जनों गांवों के लोगों के लिए खैरवा घाट एकमात्र अंत्येष्टि स्थल है। इसके बावजूद आज तक यहां कोई ठोस व्यवस्था न होना प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
इसी गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को लेकर नगर पंचायत दुदही के वार्ड नंबर 10 की सभासद गुड्डी देवी (पत्नी/प्रतिनिधि राजन जायसवाल) ने दिनांक 20 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी कुशीनगर को पत्र भेजकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि खैरवा घाट न सिर्फ वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अंतिम संस्कार का स्थायी स्थल है, लेकिन यहां अस्थायी शेड या चबूतरे तक की व्यवस्था नहीं है।
स्थिति इतनी भयावह है कि भीषण गर्मी, मूसलाधार बारिश और अचानक आने वाले मौसमी तूफानों में शवदाह करना परिजनों के लिए किसी यातना से कम नहीं होता। दुख की घड़ी में जहां शांति और सम्मान की आवश्यकता होती है, वहां लोग खुले आसमान के नीचे व्यवस्था के अभाव में जूझने को मजबूर हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को इंसान की आखिरी विदाई की भी चिंता नहीं?
सभासद द्वारा जिलाधिकारी से भूमि की अनुमति देने का निवेदन किया गया है, ताकि जनसहयोग अथवा किसी कार्यदायी संस्था के माध्यम से वहां अस्थायी या स्थायी संरचना का निर्माण कराया जा सके। यह मांग न तो अव्यवहारिक है और न ही असंभव, बल्कि पूरी तरह मानवीय और जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कुशीनगर प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे को भी फाइलों में दफन कर देगा, या फिर खैरवा घाट की दुर्दशा खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाएगा? अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रशासनिक उदासीनता का एक और शर्मनाक अध्याय साबित होगा।
जनता की नजरें अब जिलाधिकारी कुशीनगर पर टिकी हैं—
क्या खैरवा घाट को मिलेगा सम्मान, या यूं ही सिस्टम की बेरुखी में दम तोड़ती रहेंगी मानवीय संवेदनाएं?
