
16 जनवरी – विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिकृत सीएससी ई-गवर्नेंस के अंतर्गत संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) केंद्रों पर अब प्रशासन की पैनी नजर है। साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिले में सीएससी केंद्रों का व्यापक सत्यापन एवं निरीक्षण अभियान तेज कर दिया गया है। इसका उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आम नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रखना है।
देशभर में पहले ही हजारों ऐसे सीएससी केंद्रों को बंद किया जा चुका है, जो निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर सके। जिन केंद्रों ने अपने अधिकृत स्थान पर संचालन, रेट लिस्ट, ब्रांडिंग एवं पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र (पीसीसी) प्रस्तुत नहीं किया, उनकी सीएससी आईडी निष्क्रिय कर दी गई। यह स्पष्ट संकेत है कि अब लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जनपद कुशीनगर में भी इसी नीति के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सीएससी जिला प्रबंधक गौरव पाण्डेय ने बताया कि प्रथम चरण में जिले के कुल 500 सीएससी केंद्रों को पुनरीक्षण के उपरांत बंद किया गया है। इनमें से अब तक 70 केंद्रों का पुनः सत्यापन पूरा किया जा चुका है। इन केंद्रों के माध्यम से बिजली बिल भुगतान, प्रधानमंत्री योजनाओं का पंजीकरण, पैन-पासपोर्ट, बीमा सेवाएं, ई-डिस्ट्रिक्ट, यूसीएल तथा बैंकिंग जैसी महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाएं दी जाती हैं। ऐसे में इन केंद्रों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता अत्यंत आवश्यक है।
सत्यापन के दौरान केंद्रों की ब्रांडिंग, सेवा सूची व रेट लिस्ट की उपलब्धता तथा पुलिस सत्यापन की जांच की जा रही है। विशेष ऐप के माध्यम से जियो-टैगिंग कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केंद्र वास्तव में अपने पंजीकृत स्थान पर ही संचालित हो रहे हैं। हर मानक पर खरा न उतरने वाले केंद्रों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का यह अभियान साफ संदेश देता है कि डिजिटल सेवा के नाम पर जनता के विश्वास से खिलवाड़ अब नहीं चलेगा। सीएससी संचालकों को न केवल स्वयं सतर्क रहना होगा, बल्कि आमजन को भी साइबर फ्रॉड के प्रति जागरूक करना उनकी जिम्मेदारी है। यह कार्रवाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है—अब या तो मानकों पर चलिए, या सिस्टम से बाहर हो जाइए।

