
कुशीनगर और देवरिया के पुलिस अधीक्षक को पुलिस मुख्यालय संबद्ध करने के बाद अब एडीजी गोरखपुर जोन ने कुल 33 पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर हुए।
कसया थाना अध्यक्ष अमित शर्मा , तमकुही थाना अध्यक्ष सुशील शुक्ला के साथ साथ 3 चौकी प्रभारी भी लाइन हाजिर हुए ।
गोरखपुर में पशु तस्करों द्वारा छात्र की हत्या के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और लोगों के भीतर गुस्से की लहर दौड़ गई थी। जनता की नाराज़गी और लगातार हो रही मांगों को देखते हुए पुलिस विभाग पर कड़ी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया। इसी क्रम में कुशीनगर और देवरिया के पुलिस अधीक्षकों को उनके पद से हटाकर सीधे पुलिस मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया था। यह कदम संकेत था कि उच्च अधिकारियों तक जवाबदेही तय की जाएगी।
लेकिन कार्यवाही यहीं नहीं रुकी। अब गोरखपुर जोन के एडीजी ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने लापरवाही और जिम्मेदारियों में चूक करने वाले कुल 33 पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। इस सूची में दो प्रमुख थाना अध्यक्ष भी शामिल हैं—कसया थाना प्रभारी अमित शर्मा और तमकुही थाना प्रभारी सुशील शुक्ला। इनके अलावा तीन चौकी प्रभारियों को भी तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।
एडीजी गोरखपुर जोन ने देर रात निरीक्षण कर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की और पाया कि कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही हुई है। खासतौर पर पशु तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने में पुलिस नाकाम रही थी। यही नहीं, इलाके में सक्रिय नेटवर्क के बारे में पहले से कई बार शिकायतें मिल चुकी थीं, लेकिन उचित कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह रही कि अपराधियों के हौसले बुलंद रहे और इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, जिन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है, उन पर केवल लापरवाही ही नहीं बल्कि संदिग्ध आचरण और मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप भी हैं। एडीजी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आदेश दिया है कि सभी थाना और चौकियों पर नियमित गश्त, खुफिया जानकारी जुटाने और अवैध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस पूरी कार्यवाही के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। कई अधिकारियों और कर्मियों के बीच यह संदेश साफ हो गया है कि जिम्मेदारी से समझौता करने की स्थिति में अब किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, आम जनता इस कदम का स्वागत कर रही है। लोगों का मानना है कि अगर इसी तरह की सख्ती लगातार जारी रही, तो अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और पुलिस पर भरोसा बहाल होगा।
गोरखपुर में छात्र की हत्या ने जिस तरह से समाज को झकझोर दिया है, वह प्रशासन के लिए भी चेतावनी है कि अपराधियों पर अंकुश लगाने में ढिलाई भारी पड़ सकती है। यही कारण है कि कार्रवाई का यह क्रम केवल गोरखपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जोन में इसकी गूंज सुनाई दे रही है।
एडीजी की इस सख्त कार्रवाई से एक संदेश यह भी गया है कि पुलिस विभाग में सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी हुई है और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अपनी भूमिका पूरी निष्ठा के साथ निभानी होगी। वरना, कार्रवाई तय है।
