

कुशीनगर जनपद के दुदही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा दुमही में शहीद स्वर्गीय चंद्रभान चौरसिया की स्मृति में निर्मित स्मृति स्थल का वर्षों बाद भी अनावरण न हो पाना प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत की स्मृति से जुड़ा यह स्थल आज भी अधूरा है, जबकि शहीद की पत्नी न्याय की आस में दफ्तर-दर-दफ्तर भटकती रहीं।
शहीद की पत्नी पिंकी चौरसिया ने बताया कि स्मृति स्थल के अनावरण और सम्मानजनक पूर्णता के लिए वह लंबे समय से दुदही ब्लॉक के अधिकारियों से गुहार लगाती रहीं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासनों का पुलिंदा थमा दिया गया। न तारीख तय हुई, न जिम्मेदारी तय हुई—बस फाइलें चलती रहीं और सम्मान ठहरता रहा। अंततः विवश होकर उन्होंने जिलाधिकारी कुशीनगर को लिखित शिकायत सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की।
मामले की गंभीरता को भांपते हुए जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने त्वरित संज्ञान लिया और मुख्य विकास अधिकारी को स्पष्ट निर्देश जारी किए। डीएम के हस्तक्षेप के बाद वर्षों से जमी प्रशासनिक जड़ता में हरकत दिखी। निर्देश मिलते ही सीडीओ एवं एसडीएम आकांक्षा मिश्रा मौके पर पहुंचीं। उनके साथ ब्लॉक की पूरी टीम मौजूद रही और स्मृति स्थल की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया गया।
पिंकी चौरसिया ने भावुक स्वर में कहा कि उनका संघर्ष किसी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि उस सम्मान के लिए है जिसके हकदार उनके शहीद पति हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्मृति स्थल का अनावरण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति बलिदान की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति है।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी एकमत होकर प्रशासन से मांग की कि शहीद परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए वर्षों से लंबित कार्य को अविलंब पूर्ण कराया जाए। उनका कहना है कि शहीदों के सम्मान में देरी, पूरे समाज की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
अब जब डीएम के सख्त रुख से प्रशासन हरकत में आया है, उम्मीद है कि शहीद चंद्रभान चौरसिया की स्मृति को वह सम्मान मिलेगा, जिसका वह और उनका परिवार वर्षों से इंतजार कर रहा है।
