

विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
दिनांक – 14 नवम्बर 2025
कुशीनगर से धर्मेन्द्र पांडेय की खास रिपोर्ट
कुशीनगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हैरान कर देने वाला मामला मंगलवार को सामने आया, जिसने जनपद में पुलिस-प्रशासन की लापरवाही और कागजी कार्रवाई की पोल खोलकर रख दी। जिस युवक की चार साल पहले सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी, उसी को गुंडा एक्ट में पाबंद करते हुए छह माह का जिला बदर कर दिया गया!
मामला खड्डा क्षेत्र निवासी हर्षित सिंह का है, जिसकी वर्ष 2021 में वाराणसी के लहरतारा पुल पर बाइक दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी। घरवालों ने चार साल पहले ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। लेकिन कुशीनगर में बैठा प्रशासन शायद यह जानने या जांचने की जरूरत ही नहीं समझ सका कि जिसकी फाइल पर कार्रवाई की जा रही है… वह तो अब इस दुनिया में है ही नहीं।
मंगलवार को एडीएम न्यायिक प्रेम कुमार राय ने नियंत्रण अधिनियम की धारा 3/4 के तहत हर्षित सिंह सहित कुल चार व्यक्तियों को जनपद से बाहर देवरिया के लिए छह माह जिला बदर करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश जारी होते ही मामला सोशल मीडिया से लेकर गांव तक चर्चा का विषय बन गया। स्थानीय लोग प्रशासन की इस भारी लापरवाही पर कटाक्ष करते नहीं थक रहे हैं।
गांव के लोग कह रहे हैं कि “मरने के बाद भी अगर कोई गुंडा घोषित हो सकता है, तो कुशीनगर प्रशासन की फाइलें भी शायद भूतों के हवाले चल रही होंगी।” किसी ने मजाक में कहा—“अब शायद प्रशासन मृतकों की उपस्थिति प्रमाण पत्र भी मांगना शुरू कर दे!”
परिवार के लोग स्वाभाविक रूप से स्तब्ध हैं। वे कह रहे हैं कि उनका बेटा चार साल पहले मर गया, लेकिन प्रशासन आज भी उसे जिंदा मानकर जिलाबदर कर रहा है। यह न सिर्फ संजीदगी की कमी है, बल्कि कानून के इस्तेमाल के नाम पर खुली लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण भी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मृतक की जानकारी तक प्रशासन के पास नहीं है, तो ऐसे आदेशों की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठता है। क्या इसी तरह फाइलों में नाम देखकर बिना जांच के लोग जिलाबदर किए जा रहे हैं? क्या प्रशासन के पास वास्तविक आंकड़े ही नहीं हैं? या फिर औपचारिकता निभाने के नाम पर कागजों को ही “सच्चाई” मान लिया गया है?
फिलहाल मामला उजागर होने के बाद पूरे जनपद में सवालों की बौछार है —
क्या कुशीनगर प्रशासन अब मृतकों को भी अपराधी घोषित करेगा?
क्या फाइलों की जांच सिर्फ साइन करने तक सिमट गई है?
और सबसे बड़ा सवाल — आखिर ऐसी चूक के लिए जिम्मेदार कौन?
कुशीनगर पुलिस व प्रशासन की इस “अनोखी कार्रवाई” ने जनपद में कानून व्यवस्था के नाम पर चल रहे सिस्टम को आईना दिखा दिया है।
