
आस्था ट्रेडिंग कंपनी पर निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी का आरोप, धोखाधड़ी उजागर होने के बाद पीड़ितों में हड़कंप और जांच तेज़।
विश्वजीत ने सीएम योगी के गृह जनपद से ठगी का बड़ा खेल रचा, करोड़ों की धोखाधड़ी उजागर होते ही जांच एजेंसियों में हलचल तेज़।
पूर्वांचल से बिहार–झारखंड तक फैला जाल, क्राइम ब्रांच की टीमें सक्रिय
कुशीनगर।
“रुपया लगाइए, मुनाफा कमाइए और कुछ ही दिनों में रोडपति से लखपति–करोड़पति बन जाइए।”
यही सुनहरा सपना दिखाकर आस्था ट्रेडिंग कंपनी ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, महराजगंज, लखनऊ, कानपुर से लेकर बिहार और झारखंड तक सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये ठग लिए। शुरुआत में निवेशकों को बड़े-बड़े वादे किए गए और जब पैसा लौटाने का समय आया तो कंपनी के ऑफिसों के बाहर ताला लटका मिला। इसी के बाद निवेशकों को पता चला कि वे एक सुनियोजित ठगी का शिकार बन चुके हैं।
पीड़ितों ने कंपनी के संचालक विश्वजीत श्रीवास्तव और उनकी पत्नी चंदा के खिलाफ तहरीर देना शुरू किया। जांच में यह भी सामने आया है कि विश्वजीत का पुराना रिकॉर्ड भी संदिग्ध रहा है और उसके खिलाफ लखनऊ में भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं।
गोरखपुर से शुरू हुआ ठगी का साम्राज्य
सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2016 में विश्वजीत ने गोरखपुर के चरगांवा में राणा हॉस्पिटल के पास अपना पहला ऑफिस खोला था। खुद को ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताकर उसने लोगों का भरोसा जीता और इसके बाद नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए अपना नेटवर्क मजबूत किया।
धीरे-धीरे यह नेटवर्क पूर्वांचल के हर जिले में फैल गया और फिर बिहार–झारखंड तक भी कंपनी ने अपनी पकड़ बना ली। इस दौरान कंपनी ने मीटिंग, संगोष्ठी और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया।
लालच और भरोसे का धंधा

जानकारी के अनुसार आस्था ट्रेडिंग कंपनी ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से निवेशकों को जोड़ना शुरू किया। कंपनी के कर्मचारी 10 से 20 प्रतिशत मासिक रिटर्न का लालच देते थे। जितना ज्यादा निवेश, उतना ज्यादा मुनाफे का दावा किया जाता था। शुरुआती कुछ महीनों में लोगों को भुगतान कर कंपनी ने विश्वास जीत लिया, लेकिन अचानक बहानेबाजी शुरू हो गई—
सर्वर डाउन
खाते सीज़
ऑडिट
नियमों में बदलाव
धीरे-धीरे कंपनी के सभी कार्यालय बंद हो गए, मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गए और वेबसाइट गायब हो गई। इसके बाद पीड़ित निवेशक पुलिस के पास पहुंचे।
पीड़ितों की जीवन भर की कमाई लुटी
पुलिस को दी गई तहरीरों में कई निवेशकों ने बताया है कि उन्होंने—
जीवनभर की जमा पूंजी
पेंशन की रकम
LIC मनी बैक
जमीन बेचकर मिली धनराशि
कंपनी में निवेश की थी।
अधिकतर पीड़ित मध्यमवर्गीय परिवार, छोटे व्यापारी, निजी कर्मचारी और बेरोजगार युवा थे, जिन्हें “कम पैसे में अधिक मुनाफा” का झांसा देकर फंसाया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने कानपुर, लखनऊ और गोरखपुर में भी अपना मजबूत नेटवर्क तैयार किया था। यहां स्थानीय एजेंटों के जरिए होटल मीटिंग, प्रेरणात्मक कार्यक्रम और सोशल मीडिया प्रचार चलाया जाता था।
क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि कंपनी का एक मुख्य आरोपी मोबाइल लोकेशन बदलते हुए कोलकाता में सक्रिय है। वहीं दो अन्य सहयोगियों की तलाश कानपुर और झारखंड में की जा रही है।
जांच में पोंजी स्कीम की पुष्टि

पीड़ितों से मिले दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि आस्था ट्रेडिंग कंपनी तथाकथित पोंजी स्कीम पर चल रही थी।
इसमें नए निवेशकों से जुटाए गए पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता है।
जैसे ही नए निवेशक आना बंद हो जाते हैं, पूरी स्कीम ढह जाती है।
चार्ल्स पोंजी द्वारा 1920 में की गई इसी धोखाधड़ी के नाम पर इसे पोंजी स्कीम कहा जाता है।
आस्था ट्रेडिंग कंपनी भी इसी मॉडल पर वर्षों तक लोगों को भ्रमित करती रही और अंततः करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गई।
क्राइम ब्रांच ने बढ़ाई कार्रवाई
लखनऊ क्राइम ब्रांच, गोरखपुर के शाहपुर व गुलरिहा थाना क्षेत्रों और देवरिया पुलिस ने कंपनी संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आईटी एक्ट में मुकदमे दर्ज किए हैं।
टीमें लगातार आरोपियों की लोकेशन ट्रैक कर रही हैं।
आरोपियों में शामिल प्रमुख नाम—
विश्वजीत श्रीवास्तव
चंदा श्रीवास्तव
नवीन श्रीवास्तव
नवीन चंद्र
मीनाक्षी
हरकेश
सोनू गुप्ता
राहुल
सुदामा कुशवाहा
चंदन शर्मा
फैजल
अविनाश सिंह
तथा अन्य सहयोगी
क्राइम ब्रांच ने पीड़ितों से बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि कुल ठगी की रकम का आकलन हो सके। पुलिस का अनुमान है कि वास्तविक ठगी की रकम दर्ज मामलों से कई गुना अधिक हो सकती है। यह पूरा मामला एक बड़े बहुराज्यीय वित्तीय षड्यंत्र की ओर संकेत करता है।
कानून के शिकंजे में कब आएंगे ठग?
पुलिस टीमें आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। माना जा रहा है कि यह नेटवर्क लंबे समय से संगठित तरीके से काम कर रहा था। अब देखने वाली बात होगी कि करोड़ों रुपये लेकर फरार हुए ये आरोपी कानून की पकड़ से कब तक बचे रहते हैं।
नोट —
आस्था ट्रेडिंग कंपनी से संबंधित अगली कड़ी में और जानकारी प्रकाशित की जाएगी।
यदि आपके पास इस कंपनी से जुड़ी कोई सूचना है या आप ठगी के शिकार हैं, तो अपनी जानकारी
मोबाइल नंबर — 9453347715
पर साझा कर सकते हैं।
