
विलेज फास्ट टाइम्स | विशेष रिपोर्ट
कुशीनगर। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। प्राप्त प्रार्थना-पत्र के अनुसार, ग्राम निवासी धर्मवीर कुमार पुत्र स्वर्गीय राजनरायण ने माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित शिकायत में उपजिलाधिकारी (SDM) पर आदेशों की अनदेखी और पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत में उल्लेख है कि वाद संख्या 1550/0409 में न्यायालय द्वारा 24 जून 2006 को पारित आदेश के अनुपालन में दिनांक 19.06.2023 को पैमाइश/पत्थर नस्त कराने का निर्देश दिया गया था। राजस्व टीम द्वारा 14.08.2023 को पत्थर नस्त भी कराया गया, किंतु आरोप है कि 26.12.2024 को विपक्षियों द्वारा उक्त पत्थर उखाड़कर फेंक दिया गया। इसके बाद से सीमांकन कार्य लंबित है, जिससे पीड़ित पक्ष खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
प्रार्थी का आरोप है कि कई बार SDM कार्यालय में गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि कथित तौर पर अब तक संबंधित प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि SDM सुनवाई से इनकार कर रही हैं और केवल “माफियाओं की बात” सुनी जा रही है। इन आरोपों ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन की निष्पक्षता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।
पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री से मामले का अवलोकन कर SDM के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेशों के बावजूद सीमांकन कार्य ठप रहता है, तो कानून के शासन पर भरोसा कमजोर होता है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
मामले को लेकर जब तहसील प्रशासन से संपर्क किया गया, तो आधिकारिक प्रतिक्रिया में बताया गया कि “प्रकरण की जांच की जा रही है, सभी पक्षों को सुनकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।” हालांकि, अब तक सीमांकन की नई तिथि घोषित नहीं होने से असंतोष बरकरार है।
तमकुहीराज का यह मामला प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा बनता जा रहा है। अब देखना यह है कि जांच और कार्रवाई के दावों के बीच पीड़ित को वास्तविक न्याय कब मिलता है।
