

30 जनवरी | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत शुक्रवार को संयुक्त जिला चिकित्सालय, रविन्द्रनगर धूस, कुशीनगर के सभागार कक्ष में “कन्या जन्मोत्सव” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में कन्या जन्म को उत्सव के रूप में स्थापित करना तथा बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच को मजबूती देना रहा।
कार्यक्रम के दौरान तीन दिवस पूर्व जन्मी नवजात कन्याओं का केक काटकर जन्मोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर कुल 21 नवजात कन्याओं की माताओं को सम्मानित करते हुए उन्हें मिष्ठान, अंगवस्त्र, बेबी किट, हल्दी पैकेट, गुड़िया, चॉकलेट सहित उपयोगी सामग्री भेंट की गई। यह आयोजन प्रशासन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें कन्या भ्रूण हत्या, लिंग भेदभाव और बाल विवाह के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया गया है।
कार्यक्रम में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिलीप, जिला प्रोबेशन अधिकारी ध्रुवचन्द्र त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी ए.के. दूबे तथा श्रम प्रवर्तन अधिकारी सुश्री अलंकृता की गरिमामयी उपस्थिति रही। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा एवं सशक्तिकरण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि “आज की बेटियां कल का नेतृत्व हैं। सरकार बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए योजनाओं के माध्यम से ठोस कार्य कर रही है।” उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं और बालिकाओं को समान अवसर प्रदान करें।
जिला मिशन समन्वयक नलिन सिंह ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए पात्र बालिकाओं के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से बनवाने की अपील की। साथ ही महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्पॉन्सरशिप योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, वन स्टॉप सेंटर 181, वूमेन हेल्पलाइन 1090 तथा आपातकालीन सेवाओं की जानकारी पंपलेट के माध्यम से दी गई।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शपथ दिलाई गई। आयोजन में स्टाफ नर्स राजेश्वरी, प्रीति सिंह, बंदना कुशवाहा, जेंडर स्पेशलिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, आशा कार्यकर्ता एवं अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता रही।
यह कार्यक्रम न केवल एक उत्सव था, बल्कि प्रशासन की सख्त सामाजिक प्रतिबद्धता और संवेदनशील शासन व्यवस्था का स्पष्ट संदेश





