
गोरखपुर। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों को राहत देने के उद्देश्य से जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा एक कड़ा और निर्णायक आदेश जारी किया गया है, जिसने निजी और सरकारी विद्यालयों में चल रही कथित मनमानी पर सीधा प्रहार किया है। जारी निर्देश के अनुसार अब किसी भी विद्यालय परिसर में किताब, कॉपी, ड्रेस या अन्य शैक्षिक सामग्री की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित कर दी गई है।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब लंबे समय से अभिभावकों द्वारा शिकायत की जा रही थी कि कई विद्यालय अपने स्तर से निर्धारित दुकानों से ही महंगे दामों पर सामग्री खरीदने का दबाव बनाते हैं। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता था, बल्कि बाजार में प्रतिस्पर्धा भी खत्म हो रही थी। प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अमर कान्त सिंह के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में साफ कहा गया है कि कोई भी विद्यालय प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी विशेष दुकान का प्रचार-प्रसार नहीं करेगा और न ही अभिभावकों को किसी एक स्थान से खरीदारी के लिए बाध्य करेगा। अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे।
इतना ही नहीं, आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि किसी विद्यालय के खिलाफ इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इससे शिक्षा माफियाओं और कमीशनखोरी की प्रवृत्ति पर लगाम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिक्षा जगत में इस फैसले को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो न सिर्फ अभिभावकों को राहत देगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी अधिक निष्पक्ष और जवाबदेह बनाएगा। अब देखना यह होगा कि इस आदेश का जमीनी स्तर पर कितना सख्ती से पालन कराया जाता है और क्या वास्तव में इससे वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं पर विराम लग पाता है।
