

लखनऊ।
राजनीति के मैदान में आज जो हुआ, उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को लखनऊ के कांशीराम स्मारक मैदान में आयोजित विशाल पदर्शन में अपने राजनीतिक तेवरों से सभी को चौंका दिया।
जहां मंच पर लाखों की भीड़ “बहनजी ज़िंदाबाद” के नारे लगा रही थी, वहीं मायावती ने अपने भाषण में योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ कर अप्रत्याशित मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा कि,
“योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कुछ सख्त कदम उठाए हैं, जिनका असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है।”
यह बयान सुनते ही मैदान में मौजूद समर्थकों के बीच हलचल मच गई। विपक्षी दलों के लिए यह पल राजनीतिक रूप से बड़ा झटका था।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। मायावती ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखे शब्दों में निशाना साधा। उन्होंने कहा कि,
“सपा का शासन गुंडाराज और परिवारवाद का प्रतीक रहा है। जनता को अब झूठे वादों और नारेबाज़ी से आगे सोचने की ज़रूरत है।”
उन्होंने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “कुछ लोग सिर्फ ट्वीट और सोशल मीडिया पर राजनीति करते हैं, ज़मीन पर जनता के बीच नहीं जाते।”
कांग्रेस पर भी उन्होंने टिप्पणी की और कहा कि “कांग्रेस अब जनता के बीच अपनी साख खो चुकी है, इसलिए उसे अब बसपा पर आरोप लगाने से फुर्सत नहीं।”
इस प्रदर्शन का मकसद दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग को एकजुट करना था। मायावती ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बसपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि
“हम किसी पार्टी की B टीम नहीं हैं, बल्कि बसपा ही सच्ची सर्वजन हिताय पार्टी है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह नया रुख — योगी सरकार की आंशिक तारीफ और सपा पर सीधा हमला — उत्तर प्रदेश की सियासत में नई गणित खड़ी कर सकता है।
कुल मिलाकर, कांशीराम स्मारक मैदान से उठी मायावती की आवाज़ ने यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है। आने वाले दिनों में इसका असर सपा और भाजपा दोनों पर दिखना तय है।
