
विलेज फास्ट टाइम्स, जनपद कुशीनगर
दिनांक – 14.11.2025
कुशीनगर। करीब डेढ़ महीने से लापता चल रहे गौस आलम की गुमशुदगी के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। थाना कोतवाली पडरौना क्षेत्र के इस चर्चित केस में पुलिस, स्वाट, सर्विलांस व साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई से हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। तकनीकी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों—अनमोल कुशवाहा और राकेश यादव—को घटना में प्रयुक्त स्विफ्ट डिजायर कार (UP57BD6891) सहित गिरफ्तार कर लिया है।
घटना की शुरुआत 27 सितंबर 2025 को हुई थी, जब आवेदक एजाजुल हक ने अपने 26 वर्षीय पुत्र गौस आलम की गुमशुदगी दर्ज कराई। इसके बाद से पुलिस लगातार खोजबीन में लगी रही। जांच तेज हुई और 13 नवंबर 2025 को इस गुमशुदगी के पीछे छिपे खौफनाक सच का पर्दाफाश हो गया।
साझेदारी में कलह बनी खून की वजह!
पूछताछ में मुख्य आरोपी अनमोल कुशवाहा ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि वह और मृतक गौस आलम मिलकर बसहिया बनवीरपुर में आस्था हॉस्पिटल चलाते थे। पैसे के लेनदेन को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। गौस आलम अक्सर हिसाब-किताब को लेकर अनमोल पर आरोप लगाता और उसे बेइज्जत करता था। इसी रंजिश ने हत्या की साजिश को जन्म दिया।
अनमोल ने बताया कि 23 सितंबर की रात हॉस्पिटल में अकेले मौजूद गौस आलम पर उसने पेपर कटर (सूजा) से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद उसने अपने साथी राकेश यादव को बुलाया। दोनों ने शव को स्विफ्ट डिजायर कार में रखकर सिसवा जंगल नहर के पास छिपा दिया। शक से बचने के लिए मृतक के मोबाइल से खुद को मैसेज भी भेजा और मोबाइल व हथियार को परसौनी कला नहर में फेंक दिया।
पुलिस की सक्रियता से केस हुआ क्रैक
घटना के खुलासे में प्रभारी निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह, स्वाट प्रभारी आशुतोष सिंह, साइबर प्रभारी राजेश कुमार, सर्विलांस सेल के शनि दूबे सहित कुल 10 सदस्यीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इलेक्ट्रॉनिक जांच, तकनीकी विश्लेषण और लगातार प्रयास ने इस हत्या को उजागर करने में निर्णायक साबित किया।
आरोपियों के खिलाफ मुकदमा संख्या 640/2025 धारा 103(1)/238 बीएनएस के तहत कार्रवाई की जा रही है।
कुशीनगर पुलिस की इस तेज और प्रभावी कार्रवाई की क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है।

