
11 दिसम्बर, विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
कुशीनगर जनपद में ग्राम पंचायतों की वित्तीय पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियाँ एवं पंचायतें, कुशीनगर ने वर्ष 2023-24 की लेखा परीक्षा रिपोर्ट में भारी-भरकम अनियमितताओं का पर्दाफाश किया है। रिपोर्ट के अनुसार जनपद की 30 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये के दुरुपयोग, अपव्यय, हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।
यह रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट महेन्द्र सिंह तंवर ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली 1947 के नियम 256(1) के तहत सभी संबंधित ग्राम प्रधानों को दो माह के भीतर स्पष्टीकरण देने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने साफ चेतावनी दी है कि “समयसीमा में स्पष्टीकरण नहीं देने या संतोषजनक उत्तर न मिलने पर संबंधित धनराशि की भू-राजस्व की भांति वसूली की कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाएगी।” प्रशासन के इस सख्त रुख से पंचायत विभाग में अफरा-तफरी मची हुई है।
कौन-कौन सी पंचायतें जांच के घेरे में?
जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में जिन ग्राम पंचायतों में अनियमितताएँ मिली हैं, उनमें जनपद के सभी प्रमुख विकास खण्डों—दुदही, खडडा, रामकोला, कप्तानगंज, पडरौना, फाजिलनगर, सेवरही, तमकुही, विशुनपुरा, नेबुआ नौरंगिया—की पंचायतें शामिल हैं।
इन पंचायतों में चिन्हित अनियमितताएँ ₹3,950 से लेकर ₹30,65,481 तक के रकम तक पाई गई हैं। कुछ ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं का आकार इतना बड़ा है कि विकास कार्यों की वास्तविकता और भुगतान दोनों ही संदेह के घेरे में आ गए हैं।
जिन पंचायतों में इन घोटालों के निशान मिले हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
ग्राम पंचायत लोहरपट्टी, विकास खण्ड दुदही
ग्राम पंचायत लखुआ लखुई, विकास खण्ड खडडा
ग्राम पंचायत रामपुर गोनहा, खडडा
ग्राम पंचायत बसडीला, खडडा
ग्राम पंचायत सोहरौना, विकास खण्ड रामकोला
ग्राम पंचायत बिहुली निस्फी, रामकोला
ग्राम पंचायत सपहा, रामकोला
ग्राम पंचायत सुम्हाखोर, कप्तानगंज
ग्राम पंचायत भडसर खास, कप्तानगंज
ग्राम पंचायत गांगरानी, पडरौना
ग्राम पंचायत दलबहादुर छपरा, पडरौना
ग्राम पंचायत साखोपार, पडरौना
ग्राम पंचायत विशुनपुरा, फाजिलनगर
ग्राम पंचायत धनहां, फाजिलनगर
ग्राम पंचायत जौरामनराखन, फाजिलनगर
ग्राम पंचायत नोनिया पट्टी, फाजिलनगर
ग्राम पंचायत कनौरा, फाजिलनगर
ग्राम पंचायत परसा उर्फ सिरसिया, सेवरही
ग्राम पंचायत पिपराघाट एहतमाली, सेवरही
ग्राम पंचायत बभनौली, तमकुही
ग्राम पंचायत भुजौली, विशुनपुरा
ग्राम पंचायत पुर्नहा बुजुर्ग, विशुनपुरा
ग्राम पंचायत नगरी, विशुनपुरा
ग्राम पंचायत बभनौली, नेबुआ नौरंगिया
ग्राम पंचायत सिरसिया बुजुर्ग, नेबुआ नौरंगिया
ग्राम पंचायत बगही, तमकुही
ग्राम पंचायत धुरिया कोट, तमकुही
ग्राम पंचायत पखिहवा उर्फ कर्जहा, तमकुही
ग्राम पंचायत रामपुर उर्फ खुशहाल टोला, फाजिलनगर
ग्राम पंचायत उस्मानपुर, फाजिलनगर
इन सभी पंचायतों में मनमाने ढंग से भुगतान, योजनाओं में धन का अपव्यय, अपूर्ण कार्यों का पूरा भुगतान, फर्जी बिल, बिना कार्य के धन निकासी, और सामग्री खरीदी में भारी गड़बड़ी के आरोप रिपोर्ट में दर्ज हैं।
कितनी बड़ी है अनियमितताओं की राशि?
अधिभार प्रतिवेदन के अनुसार इन 30 पंचायतों में मिली अनियमितताओं का कुल आंकड़ा कई करोड़ रुपये तक पहुँचता है। यह राशि विभिन्न विकास कार्यों—जैसे नाली निर्माण, सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, शौचालय निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण, पंचायत भवन की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, खड़ंजा निर्माण और अन्य ग्राम विकास योजनाओं—में किए गए खर्च पर सवाल खड़े करती है।
डीएम का बड़ा बयान—”शून्य सहनशीलता नीति”
जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने स्पष्ट कहा—
“सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पंचायतों की जवाबदेही तय होगी और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत से प्राप्त स्पष्टीकरण का बिंदुवार परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी पंचायत का उत्तर तथ्यहीन, असंतोषजनक या भ्रामक पाया गया, तो संबंधित प्रधान, सचिव या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर वित्तीय रिकवरी के साथ-साथ विभागीय दंडात्मक कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाएगी।
विकास कार्यों की जमीनी हकीकत पर उठे सवाल
ग्राम स्तर पर कई स्थानों पर वर्षों से शिकायतें मिलती रही हैं कि—
आधे-अधूरे कार्यों को पूरा दिखा कर भुगतान कर दिया जाता है।
सड़कें कागज पर बनती हैं, जमीन पर नहीं।
सामग्री कम गुणवत्ता की लगाई जाती है।
मजदूरों को वास्तविक भुगतान नहीं मिलता।
फर्जी बिलों और मनमानी दरों पर खरीद दिखाकर धन निकाला जाता है।
अब लेखा परीक्षा की रिपोर्ट इन संदेहों को मजबूत कर रही है। ग्रामीणों में भी इस रिपोर्ट को लेकर काफी चर्चा है और लोग उम्मीद जता रहे हैं कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि गांवों का विकास सही मायने में जमीन पर दिखाई दे सके।
विलेज फास्ट टाइम्स की टिप्पणी
कुशीनगर की पंचायतों में इस स्तर की अनियमितताएँ सामने आना केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास कार्यों के साथ एक सीधा विश्वासघात है। करोड़ों रुपये की योजनाओं का उद्देश्य गांवों का विकास है, लेकिन जब जिम्मेदार लोग ही इस धन को निजी लाभ के साधन में बदल दें, तो परिणामस्वरूप ग्रामीणों को सिर्फ टूटी सड़कें, अधूरे कार्य और कागजी विकास ही मिलता है।
डीएम की यह सख्त कार्यवाही जनपद के लिए न सिर्फ आवश्यक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि प्रशासन अब पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार को झेलने के मूड में नहीं है।
