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विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | मकर संक्रांति विशेष
सेवरही / कुशीनगर
नगर पंचायत सेवरही के माल गोदाम चौक निवासी व प्रतिष्ठित व्यवसायी संदीप मिश्रा ने एक बैठक के दौरान मकर संक्रांति के धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि मानव जीवन को ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता प्रदान करने वाला महापर्व है। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिससे प्रकृति में नवजीवन का संचार होता है और यही कारण है कि इस दिन किया गया प्रत्येक पुण्य कर्म अक्षय फल प्रदान करता है।
संदीप मिश्रा ने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि मकर संक्रांति के दिन सभी छोटी-बड़ी नदियाँ गंगा के समान पुण्यदायिनी बन जाती हैं। इस दिन विधिवत स्नान करने से मनुष्य तेजस्वी, आरोग्यवान और पुण्यात्मा बनता है, जबकि स्नान न करने से व्यक्ति को अनेक जन्मों तक निर्धनता और रोगों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस पर्व पर काले तिल का विशेष महत्व है। स्नान से पूर्व तिलयुक्त उबटन लगाना अत्यंत लाभकारी होता है। तिल मिश्रित जल से भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। तिल का दान पापों का नाश करता है, सेवन स्वास्थ्यवर्धक होता है तथा तिल से किया गया हवन पुण्यवर्धक माना गया है।
उन्होंने कहा कि तिल-गुड़ के व्यंजन, चावल और चने की दाल से बनी खिचड़ी ऋतु परिवर्तन से होने वाले रोगों से रक्षा करती है। तिल मिश्रित जल से स्नान करने से शरीर में मौसम परिवर्तन के दुष्प्रभावों से लड़ने की शक्ति विकसित होती है। सूर्य उपासना से ओज और तेज की वृद्धि होती है।
संदीप मिश्रा ने पद्म पुराण में वर्णित सूर्यदेव के मूल मंत्र
“ॐ ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः”
को अत्यंत प्रभावशाली बताते हुए कहा कि श्रद्धा एवं आत्मशुद्धि की भावना से इस मंत्र का जाप करने से आत्मानंद और प्रभु-प्रेम की वृद्धि होती है। सूर्य नमस्कार से ओज, बल, तेज और बुद्धि का विकास होता है। सूर्य को अर्घ्य, सूर्य स्नान और ध्यान से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि सूर्य की धूप में 2 से 4 घंटे तक रखे गए घी, तेल और पानी अधिक सुपाच्य और रोगनाशक हो जाते हैं। धूप में रखे पानी से स्नान करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सुदृढ़ होती है।
अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि मकर संक्रांति के पावन अवसर पर स्नान-दान, तिल सेवन और सूर्य उपासना कर इस महापर्व का पूर्ण पुण्य लाभ प्राप्त करें और अपने जीवन को ऊर्जा व आरोग्य से भरें।

