

विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
कुशीनगर के हरैया बुजुर्ग गांव में आज भावनाओं, आक्रोश और सवालों का एक साथ उफान देखने को मिला। स्वर्गीय कृष्ण मोहन सिंह, शिक्षक, की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई आत्महत्या के विरोध में भाजपा नेता नीरज सिंह बिट्टू के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने कैंडल मार्च निकालकर न्याय की बुलंद मांग की। गांव की गलियों से लेकर मुख्य चौराहे तक मोमबत्तियों की कतारें थीं, लेकिन इन रोशनियों के बीच व्यवस्था पर गहरा अंधेरा छाया दिखा।
मार्च के दौरान लोगों ने एक सुर में विभागीय प्रताड़ना को शिक्षक की मौत का कारण बताते हुए जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। “दोषियों को फांसी दो” के नारे हवा में गूंजते रहे। भीड़ में शामिल लोगों के चेहरों पर गुस्सा साफ झलक रहा था—मानो यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि संवेदनहीन सिस्टम के खिलाफ सामूहिक आरोप-पत्र हो।
नीरज सिंह बिट्टू ने कहा कि यदि किसी शिक्षक को इतना मानसिक दबाव झेलना पड़े कि वह जीवन से हार मान ले, तो यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक असफलता का करारा तमाचा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में निष्पक्ष जांच और शीघ्र न्याय की मांग दोहराई। सवाल उठता है—क्या फाइलों की धूल झाड़ने में ही समय बीतेगा, या जिम्मेदारी तय होगी?
कैंडल मार्च में गिरजेश सिंह, धर्मेंद्र, शिक्षक राजकुमार, जितेंद्र सिंह, अजय चौधरी, अजय सिंह, अवधेश सिंह, विनय कुमार सिंह, रामनाराय यादव, छोटू मिश्रा, मुखलाल प्रसाद, अनिल शर्मा, राहुल सिंह, गोलू सिंह, संजीव कुमार शर्मा, चंदन सिंह, मुन्ना सिंह, रामानंद चौधरी, रामलखन चौधरी, रामदुलार चौधरी, मृतक के भाई अजय सिंह, विकास कुशवाहा, सूरज सिंह, प्रधान प्रतिनिधि अवनीश सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर एक शिक्षक—जो समाज को दिशा देता है—खुद ही अन्याय और दबाव के बोझ तले टूट जाए, तो यह पूरे तंत्र की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है। मोमबत्तियां बुझेंगी, पर सवाल नहीं—क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या न्याय भी औपचारिकताओं की भेंट चढ़ेगा?
