
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर विशेष रिपोर्ट
कुशीनगर में सरकारी कार्यों की पारदर्शिता पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। समय से टेंडर नहीं खोलने को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला उजागर होते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर अफसरशाही तक हलचल तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री की सख्त दखल के बाद अब इस प्रकरण पर जांच की रफ्तार भी तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, विकास कार्यों से जुड़े एक महत्वपूर्ण टेंडर को तय समय-सीमा के बावजूद नहीं खोला गया। आरोप है कि जानबूझकर देरी कर पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। इस कथित खेल में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास हुआ, जिससे ईमानदार ठेकेदारों में भारी रोष है। कई ठेकेदारों ने इसे खुला भ्रष्टाचार बताते हुए उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत की।
मामला जब कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि “सरकारी धन और विकास कार्यों में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी चाहे जितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कार्रवाई तय है।” इस बयान के बाद प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई और संबंधित फाइलों की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
सूत्रों की मानें तो जांच के दायरे में कई जिम्मेदार अफसर और कर्मचारी आ सकते हैं। टेंडर प्रक्रिया, समय-सीमा, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी शिकंजा भी कसना तय माना जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पारदर्शिता के दावे जमीनी हकीकत में क्यों दम तोड़ देते हैं? जनता का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भ्रष्टाचारियों के हौसले और बुलंद होंगे। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि कुशीनगर में सचमुच भ्रष्टाचार पर प्रहार होगा या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
