
हफ्ता वसूली का खुला कबूलनामा, वायरल ऑडियो में सीओ तक रकम पहुंचने का दावा, पुलिस तंत्र कठघरे में खड़ा प्रशासन
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
जनपद कुशीनगर में हाइवे पर चल रही अवैध वसूली को लेकर एक बार फिर पुलिस तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो ने ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने न सिर्फ आम जनता को झकझोर दिया है, बल्कि वर्दी की गरिमा और कानून की साख पर भी गहरा आघात पहुंचाया है। यह मामला अब महज आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खुले कबूलनामे के रूप में सामने आ गया है।
वायरल ऑडियो कथित तौर पर खड्डा थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें एक सिपाही हाइवे पर की गई अवैध वसूली की रकम के बंटवारे का जिक्र करता सुनाई दे रहा है। बातचीत में जिस सहजता और आत्मविश्वास के साथ रकम ऊपर तक पहुंचाने की बात कही जा रही है, उससे यह साफ प्रतीत होता है कि यह कोई एक-दो दिन का खेल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और लंबे समय से चल रहा तंत्र है। ऑडियो में दस हजार रुपये तत्कालीन क्षेत्राधिकारी तक पहुंचाने की बात सामने आने के बाद पुलिस–अफसर गठजोड़ की आशंका और भी गहरी हो गई है।

हालांकि बताया जा रहा है कि यह ऑडियो लगभग एक वर्ष पुराना है, लेकिन सवाल यह नहीं कि ऑडियो आज वायरल क्यों हुआ। असली सवाल यह है कि उस समय यह अवैध वसूली किसके संरक्षण में चल रही थी और किन-किन लोगों की मौन सहमति इसमें शामिल थी। कानून के रखवाले जब खुद कानून को जेब में रखकर वसूली का हिस्सा बन जाएं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे—यह सबसे बड़ा प्रश्न बनकर उभरा है।
रसूख और संरक्षण का खेल
सूत्रों के अनुसार, वायरल ऑडियो में जिन सिपाही का नाम सामने आ रहा है, उनका स्थानांतरण एक वर्ष पूर्व पर्यटन थाने में हो चुका था, इसके बावजूद वे खड्डा थाने में जमे रहे। नियमों को ताक पर रखकर एक सिपाही का मनचाही तैनाती पर टिके रहना, रसूख और संरक्षण की ओर साफ इशारा करता है। आरोप यहां तक हैं कि उक्त सिपाही न सिर्फ थाने के नियमित कार्यों में दखल रखते थे, बल्कि अधिकारियों के निजी कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते देखे गए।
यह स्थिति पुलिस विभाग की निष्पक्षता, अनुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आमजन में यह धारणा मजबूत हो रही है कि हाइवे पर खुलेआम चल रही वसूली बिना उच्चाधिकारियों की जानकारी या सहमति के संभव ही नहीं है। विधि विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि वायरल ऑडियो की सत्यता जांच में प्रमाणित होती है, तो यह मामला सिर्फ एक सिपाही या एक थाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय करनी होगी।
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर का मानना है कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसे हल्के में लेना पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता के लिए घातक साबित हो सकता है। आवश्यकता है कि उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो। साथ ही, यह भी जरूरी है कि प्रशासन यह स्पष्ट करे कि आखिर किन परिस्थितियों में नियमों को दरकिनार कर ऐसे रसूखदारों को संरक्षण मिलता रहा। यदि समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो यह प्रकरण पुलिस व्यवस्था पर जनता के विश्वास को और कमजोर करेगा।
