
02 दिसम्बर | विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
कुशीनगर जनपद के नेबुआ नौरंगिया विकासखंड के ग्राम सभा पिपरा खुर्द के टोला गुलहरिया में बुखार से दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद पूरा गांव दहशत में है। हालात इतने गंभीर हो गए कि आज जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य विकास अधिकारी विंदिता श्रीवास्तव और मुख्य चिकित्साधिकारी चंद्रप्रकाश खुद गांव पहुंचे, पीड़ित परिवारों से मिले और जमीनी हालात का जायजा लिया। गांव में प्रशासनिक हलचल पूरे दिन बनी रही।
मेडिकल कैंप में 56 बच्चों की जांच, 14 के सैम्पल मेडिकल कॉलेज भेजे गए
डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया, जहां 56 बच्चों का चेकअप किया गया। इनमें से 14 बच्चों के ब्लड सैंपल जांच हेतु मेडिकल कॉलेज भेज दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ कहा कि घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन लापरवाही की कोई जगह नहीं है।
कैसे बिगड़ी दो मासूमों की जान? परिजनों की दर्दनाक दास्तान
टोला गुलहरिया निवासी राजकुमार के 7 वर्षीय बेटे सागर को अचानक तेज बुखार आया। निजी अस्पताल से लेकर रामकोला सीएचसी, फिर जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज—हर जगह ले जाया गया, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई। आखिरकार एम्स रेफर किया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
दूसरी ओर रामानंद का 3 वर्षीय बेटा अंश भी बुखार की चपेट में आया। उसे भी एक-एक कर सभी अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन सोमवार सुबह उसने भी अंतिम सांस ली।
सबसे चिंताजनक बात—अंश का 9 वर्षीय बड़ा भाई आर्यन भी बुखार से जूझ रहा है और उसका इलाज जारी है।
“यह बीमारी छूत की नहीं, लेकिन बेहद खतरनाक” — CMO
सीएमओ ने बताया कि मृत बच्चों में से एक बच्ची खुशी के रक्त परीक्षण में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई है—एक ऐसी जानलेवा बैक्टीरियल बीमारी जो चूहों, पशुओं के मूत्र से दूषित पानी/मिट्टी के संपर्क से फैलती है।
इसके लक्षण—अचानक तेज बुखार, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में अकड़न, आंखें लाल होना, उल्टी, किडनी–लिवर पर असर—इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं। ऐसे मामलों में तुरंत एंटीबायोटिक इलाज जरूरी है।
डीएम की सख्त अपील — “मवेशियों को घरों से दूर रखें, साफ-सफाई में बिल्कुल लापरवाही न करें”
जिलाधिकारी ने गांव के लोगों को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि बीमारी का मूल कारण जानवरों का घरों में घूमना, गंदगी और दूषित पानी हो सकता है। सभी ग्रामीणों को मवेशियों को आबादी से दूर रखने, नियमित सफाई करने और किसी भी बुखार के तुरंत इलाज पर जोर दिया।
प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई — गांव में अलर्ट मोड
प्रशासन ने हालात बिगड़ने न दें, इसके लिए कई कदम तुरंत लागू किए—
• डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग, मेडिकल किट वितरण
• एहतियातन एम्बुलेंस तैनात
• डॉक्टरों की 24 घंटे की तीन शिफ्टों में ड्यूटी
• गांव सहित पूरे जनपद में सफाई अभियान तेज
• ब्लीचिंग पाउडर, एंटी-लार्वा छिड़काव, फॉगिंग
• पशुपालन–कृषि विभाग से समन्वय
• जल निगम द्वारा पेयजल टेस्टिंग
• निगरानी समितियां पुनः सक्रिय
• अफवाहों पर रोक, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग
• डीएम द्वारा समस्त ग्राम प्रधानों के साथ ज़ूम मीटिंग
• CMO कार्यालय व विकास भवन में 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय
गांव में दहशत, प्रशासन सतर्क — लेकिन सवाल बरकरार…
दो मासूमों की मौत के बाद गांव के लोग भय के साये में हैं। प्रशासन सक्रिय है, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि सफाई, जल निकासी और मवेशियों की अनियंत्रित आवाजाही ग्रामीण इलाकों में कितना बड़ा खतरा बन सकती है।
विलेज फास्ट टाइम्स आगे भी इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।







