
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर – विशेष रिपोर्ट
तमकुहीराज तहसील में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने आम काश्तकारों और फरियादियों की नींद उड़ा दी है। बाँसगाँव निवासी, दुदही थाना क्षेत्र के मैनेजर कुशवाहा ने उत्तर प्रदेश शासन के उच्चाधिकारियों से गुहार लगाते हुए आरोप लगाया है कि तहसील तमकुहीराज के कानूनगो कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर रमेश कुशवाहा और इरफान द्वारा खुलेआम रिश्वतखोरी की जा रही है।
पीड़ित के अनुसार, बैनामा, नामांतरण तथा न्यायालयों के आदेशों को डिजिटल करने के नाम पर इन दोनों ऑपरेटरों द्वारा फरियादियों से अवैध धन की मांग की जाती है। जो व्यक्ति पैसा देने से मना करता है, उसे धमकाया जाता है और उसके काम को जानबूझकर लटकाया जाता है। गरीब किसान महीनों तक तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हो जाते हैं।
मैनेजर कुशवाहा का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत उन्होंने उपजिलाधिकारी तमकुहीराज और तहसीलदार तमकुहीराज से भी की, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे दोनों ऑपरेटरों के हौसले और बुलंद हो गए हैं और वे बेलगाम होकर जालसाजी व भ्रष्टाचार के कामों में संलिप्त हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसील में बिना “चढ़ावे” के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। किसानों की जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज महीनों तक कंप्यूटर में “लॉक” पड़े रहते हैं। कई मामलों में फरियादियों को डराया-धमकाया जाता है कि अगर आवाज उठाई तो उनका काम हमेशा के लिए अटका दिया जाएगा।
यह मामला केवल दो ऑपरेटरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। जब जिम्मेदार अधिकारियों तक शिकायत पहुँचने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो आम जनता किसके पास जाए?
पीड़ित ने शासन से मांग की है कि दोनों दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अब देखना यह है कि शासन और जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाता है—क्या भ्रष्टाचार पर प्रहार होगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?

