



कुशीनगर, 30 मार्च | विलेज फास्ट टाइम्स
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को कुशीनगर दौरे के दौरान अचानक सीएचसी फाजिलनगर पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की हकीकत सामने ला दी। द लर्निंग वर्ल्ड स्कूल के उद्घाटन से पहले किया गया यह औचक निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की जमीनी पड़ताल साबित हुआ।
अस्पताल परिसर में कदम रखते ही उप मुख्यमंत्री ने ओपीडी, इमरजेंसी वार्ड, दवा वितरण केंद्र, प्रसूति कक्ष और पैथोलॉजी विभाग का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने न केवल कागजी व्यवस्थाओं को देखा, बल्कि मौके पर मौजूद चिकित्सकों और कर्मचारियों की उपस्थिति भी चेक की। कई जगहों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक दिखीं, तो कुछ बिंदुओं पर उनकी भौंहें भी तनती नजर आईं—जो यह संकेत देने के लिए काफी था कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
सबसे अहम बात यह रही कि उप मुख्यमंत्री ने सीधे मरीजों और उनके तीमारदारों से संवाद किया। यह वही कड़ी है, जहां अक्सर असलियत बाहर आती है। मरीजों से दवा, इलाज और व्यवहार के बारे में मिली प्रतिक्रियाओं ने विभागीय दावों की पोल भी खोलने का काम किया। यहीं से साफ हो गया कि सुधार की गुंजाइश अभी भी काफी है।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिया कि “हर मरीज को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलना ही चाहिए, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।” साफ-सफाई को लेकर भी उन्होंने कड़ा रुख अपनाया और अस्पताल प्रशासन को चेताया कि गंदगी या अव्यवस्था की शिकायत मिलने पर सीधे कार्रवाई तय मानी जाए।
उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सा अधीक्षक और स्वास्थ्य कर्मियों को यह भी हिदायत दी कि दवाओं की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मरीजों के साथ संवेदनशील और मानवीय व्यवहार को अनिवार्य बताया—क्योंकि सरकारी अस्पतालों की छवि अक्सर इसी व्यवहार से बनती और बिगड़ती है।
उपस्थिति पंजिका की जांच करते हुए उन्होंने एक और अहम निर्देश दिया—बिना लिखित अनुमति और उच्च स्तर की स्वीकृति के कोई भी कर्मचारी अवकाश पर नहीं जाएगा। यह निर्देश सीधे तौर पर उन कर्मचारियों पर निशाना था, जो सिस्टम की ढिलाई का फायदा उठाकर जिम्मेदारी से बचते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने को लेकर गंभीर है और निरीक्षण सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का माध्यम है।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. उमाशंकर नायक समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, यह निरीक्षण एक संदेश था—“अब काम चलेगा नहीं, काम करना पड़ेगा।”
