
08 दिसम्बर | विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
जनपद कुशीनगर में बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाने के लिए इस बार प्रशासन ने कमर कस ली है। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशों पर आधारित बाल विवाह मुक्त भारत (BVMB) अभियान के तहत 27 नवम्बर 2025 से 08 मार्च 2026 तक 100 दिनों का सघन, प्रभावी और जन-जागरूकता से भरा विशेष अभियान शुरू हो गया है।
इस अभियान का मकसद सिर्फ औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि समाज में गहरी पैठ बना चुकी कुप्रथा को जड़ से उखाड़ फेंकना है।
अभियान ने पूरे किए एक वर्ष—अब मिशन मोड में 100 दिन
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने जानकारी दी कि बाल विवाह मुक्त भारत अभियान ने 27 नवम्बर को अपना पहला वर्ष पूरा कर लिया है। इस ऐतिहासिक अवसर को सार्थक बनाने और अभियान की गति को नई दिशा देने के लिए पूरे देश में 100 दिवसीय विशेष थीम आधारित कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
कुशीनगर में इसे मिशन मोड में लागू करने का खाका तैयार कर लिया गया है।
अभियान का उद्देश्य—सिर्फ रोकथाम नहीं, सामाजिक परिवर्तन
इस राष्ट्रीय अभियान के तीन मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं—
बाल विवाह पर प्रभावी रोकथाम,
समाज में शून्य सहनशीलता का वातावरण तैयार करना,
कानूनी जागरूकता और योजनाओं के जरिए बच्चों के अधिकारों की मजबूत सुरक्षा।
अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जाग्रत करने की मुहिम है। हर गांव, हर मोहल्ले और हर परिवार तक संदेश पहुंचाना अनिवार्य किया गया है कि बाल विवाह अपराध है और भविष्य पर कुठाराघात भी।
जिला स्तरीय संचालन समिति गठित—अब कार्रवाई तेज
अभियान की निरंतर निगरानी और जमीनी प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय संचालन समिति गठित कर दी गई है। इस समिति में लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी शामिल हैं, ताकि किसी भी स्तर पर समन्वय की कमी न रह जाए।
समिति के प्रमुख सदस्य
जिलाधिकारी — अध्यक्ष
अपर जिला जज/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण — सदस्य
अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति — नोडल अधिकारी
जिला प्रोबेशन अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, चाइल्ड हेल्पलाइन प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर — सदस्य
डीएमसी (HEW), वन स्टॉप सेंटर प्रभारी — सदस्य
प्रभारी विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट — सदस्य
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी — सदस्य
जिला सूचना अधिकारी, नगर पालिका परिषदों के अधिशासी अधिकारी — सदस्य
मदद फाउंडेशन सहित कई स्वैच्छिक संगठन — सदस्य
यह समिति पूरे अभियान की रीढ़ बनेगी और जनपद में होने वाले हर कार्यक्रम, हर जागरूकता गतिविधि और हर हस्तक्षेप की दिशा तय करेगी।
डीएम का सख्त निर्देश—100 दिन, 100% परिणाम
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग 100 दिवसीय अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखें और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। गांवों में चौपाल, स्कूलों में जागरूकता सत्र, बालिकाओं की काउंसलिंग, कानूनी जानकारी, बाल विवाह रोकथाम हेल्पलाइन को सक्रिय करना—सब पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कुशीनगर तैयार—बाल विवाह पर अंतिम प्रहार
इस अभियान से उम्मीद है कि कुशीनगर न केवल प्रदेश में उदाहरण बनेगा, बल्कि बाल विवाह मुक्त जिला बनने की दिशा में निर्णायक कदम भी बढ़ाएगा। प्रशासन, पुलिस, शिक्षा विभाग और सामाजिक संगठन मिलकर अब यह संदेश देने को एकजुट हैं—
“बाल विवाह नहीं, शिक्षा और स्वावलंबन ही बच्चों का अधिकार है।”
