
विश्वभर में गूंज रही भारतीय संस्कृति की रोशनी, दीप उत्सव बना वैश्विक पहचान का प्रतीक
कुशीनगर/नई दिल्ली।
भारत का सर्वाधिक उल्लासपूर्ण और पवित्र पर्व दीपावली अब केवल एक धार्मिक या पारिवारिक उत्सव नहीं रह गया है। यह त्योहार आज पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन-दर्शन का प्रतीक बनकर उभरा है। दीपों की यह ज्योति अब सीमाओं को पार कर वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।
दीपावली का मूल भाव — अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और निराशा पर आशा की विजय — हर देश, हर संस्कृति से मेल खाता है। यही कारण है कि बीते दो दशकों में यह पर्व विश्व स्तर पर “ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ लाइट्स” के रूप में लोकप्रिय हो चुका है। भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और प्रवासी भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक निष्ठा ने इस परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
आज भारतीय प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) विश्व के हर कोने में दीपावली की चमक फैला रहा है। लंदन से लेकर न्यूयॉर्क, सिडनी से टोरंटो, और दुबई से सिंगापुर तक — हर जगह यह त्योहार भारतीयता की जीवंत झलक पेश करता है।
लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में हर वर्ष हजारों लोग दीपावली समारोह में शामिल होते हैं। यहां भारतीय नृत्य, संगीत, कला और भोजन का रंगारंग संगम ब्रिटिश समाज को भी भारतीय संस्कृति से जोड़ता है। वहीं न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर दीपावली की जगमगाती रातें अमेरिकी नागरिकों को भारत की आध्यात्मिकता और उत्सवधर्मिता से परिचित कराती हैं। सिडनी के ओपेरा हाउस, टोरंटो के सिटी हॉल और मलेशिया के कुआलालंपुर तक दीपों की यह रोशनी भारतीय संस्कृति का परचम लहरा रही है।
दीपावली अब केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) का अहम हिस्सा बन चुकी है। जैसे योग और आयुर्वेद ने विश्व में भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाया, वैसे ही दीपावली भी आज भारत की “सांस्कृतिक ब्रांडिंग” का प्रमुख माध्यम बन गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में दीपावली पर विशेष आयोजन होते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की संसदों में दीपावली के अवसर पर विशेष संदेश दिए जाते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में दीप प्रज्ज्वलित करते हैं और ब्रिटिश प्रधानमंत्री दीपावली की शुभकामनाएं देते हैं — यह सब इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति अब वैश्विक चेतना का हिस्सा बन चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दीपावली की भावना को मानवता और शांति का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि “दीपावली केवल भारत का पर्व नहीं, बल्कि समूचे विश्व को प्रकाश, प्रेम और सकारात्मकता का संदेश देने वाला उत्सव है।”
अंततः दीपावली सिर्फ दीयों और मिठाइयों का पर्व नहीं, बल्कि मानवता, एकता और करुणा की ज्योति है। यह पर्व बताता है कि जब एक दीप जलता है, तो अंधकार मिटता है — और जब करोड़ों दीप जलते हैं, तो पूरी दुनिया आलोकित हो उठती है।
आज दीपावली भारत की उस उजली पहचान का प्रतीक बन चुकी है जो सीमाओं से परे है — एक “वैश्विक भारतीयता” जो संस्कृति, सद्भाव और मानवता की अनंत रोशनी बनकर पूरे विश्व को आलोकित कर रही है।
