कुशीनगर जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने जनपद वासियों से अपील करते हुए कहा है कि सर्पदंश से बचाव की जानकारी न होनें से बच्चों महिलाओं समेंत कई लोग जान गवाँ देते हैं। आइए हमसब मिलकर सबको जागरूक करें, और अपनें लोगों का जीवन सर्पदंश से सुरखित करें।
उन्होंने बताया कि सर्पदंश से मृत्यु का प्रमुख कारण लोगो में अज्ञानता व समय से ईलाज न कराने के वजाय झाड़-फूक आदि पर ज्यादा विश्वास करने से होती है। सांप काटने से मृत व्यक्तियों में से आधे से अधिक लोग विषहीन सर्प के काटने से मरते है। सर्पदंश के बारे में जानकारी ही बचाव है। सांप भोजन के लिए, भय व आत्मरक्षा के लिए ही काटते है। सर्प को दूर रखने के लिये सर्प के बिल में कार्बोलिक एसिड डाल दे, जिसके गंध से सॉप दूर हो जाते है। मुर्गी के चूजे व चूहों को घर से दूर रखें। ऊॅची जमीन पर चढने पानी में तैरते समय सावधान रहें। सांप को अपने आस-पास देखनें पर धीरें-धीरें उससे पीछें हटें। सांप को पकड़ने व मारने की कोशिश न करें। मलबे या अन्य बस्तुओं के निचें सांप हो सकते हैं, सर्तक रहें।
सर्पदंश के लक्षण* नाग (कोबरा) व करैत के दंश से रुधीऱ तंत्र पर असर होता है, काटे गये जगह पर दर्द, नीद आना, बंद होती पलके,पक्षाघात(स्ंचतवेपे), दोनो आंखो से एक के बजाए दो छवियां अलग-अलग दिखना, आवाज का पतला होना, सांस लेने मे तकलीफ होना, बोलने में कठिनाई होना, मुह से झाग आना,निगलने में परेशानी, शरीर के कोशिकारओ की मृत्यु, जी मिचलाना, पेट मे अत्यधिक दर्द जबकि स्केल्ड वाइपर के दंश से काटे गये स्थन पर जलन व दर्द, पसली एवं कमर के हड्डी के बीच वाली जगह पर दर्द, गहरे भूरे रंग का पेशाब होना, भ्मउवततींहम के कारण आन्तरिक कोशिकाओं एवं वाह्य कोशिकाओं में रक्तस्राव, अत्यधिक सूजन, काटे गये स्थान पर तेजी से जलन, अत्यधिक शरीर के कोशिकाओं की मृत्यु होती है।
*प्राथमिक उपचार*-सबसे पहले रोगी को आश्वस्त करें कि आप ठीक हो जाएगें क्योकि लगभग 70 से 80 प्रतिशत सांप के काटने के मामलें गैर विषैले होते हैं। शरीर के प्रभावित हिस्से से अगुठियां, घड़ी, आभूषण, जूते व तंग कपड़े हटा दें ताकि प्रभावित हिस्से मे रक्त की आपूर्ति न रुके। सर्पदंश से प्रभावित अंग को स्थिर कर दें, उसे हिलाने डुलाने से बचें। पीड़ित को जितनी जल्दी हो सके, निकटतम स्वावस्थ्य केन्द्र ले जाए।
सर्प दंश से मृत्यु होने पर सहायता राशि
अपर जिलाधिकारी(वि0/रा0) वैभव मिश्रा ने बताया कि मानव मृत्यु की दशा में सहायता राशि रु0 4.00लाख/प्रति मृतक व आवश्यक अभिलेख में पोस्टमार्टम रिपोर्ट शारीरिक विकलागंता 40-60 प्रतिशत होने पर रुपये-74,000 प्रति व्यक्ति एवं विकलांगता 60 प्रतिशत से अधिक होने पर रु0 02.50 लाख प्रति व्यक्ति सहायता राशि राज्य सरकार से देय है। सरकारी अस्पताल में एक सप्ताह से कम भर्ती होने पर रूपये-5400/- व एक सप्ताह से अधिक भर्ती होने पर रूपये- 16000/- देय है। आवश्यक अभिलेख में चिकित्सक द्वारा अस्पताल में भर्ती सम्बन्धित रिर्पोट की आवश्यकता होती है। सर्पदंश से पशु मृत्यु के दौरान बड़े दुधारू पशु जैसे गाय, भैस आदि में रूपये-37500/- प्रति पशु व बड़े गैर दुधारू पशु बैल, घोड़ा आदि में रूपये-32000/- प्रति पशु व छोटे दुधारू पशु बकरी भेड़ सुअर आदि में रूपये-4000/-प्रति पशु एवं छोटे गैर दुधारू पशु गाय या भैस का बच्चा आदि रूपये-20000/-प्रति पशु एवं पोर्ल्टी कुक्कुट के मृत्यु उपरान्त रूपये-100/- प्रति कुक्कुट दिया जाता है। उक्त हेतु आवश्यक अभिलेख पोस्टमार्टम/पशुचिकित्सक की रिपोर्ट की आवश्यकता होती है। मृत्यु या घायल होने की दशा मेे तुरन्त सूचना सम्बन्धित लेखपाल को देना होता है। उक्त घटना से प्रभावित व्यक्ति समस्त आवश्यक अभिलेख सम्बन्धित लेखपाल को दे दे।
सर्पदंश की घटना होने पर तुरंत क्या करें क्या न करें
सर्पदंश के स्थान को साबुन व गर्म पानी से धोयेें। सर्पदंश वाले अंग को स्थिर (फिक्स) रखें। काटे हुए अंग को हृदय के लेवल से निचें रखें। घायल व्यक्ति को सात्वना दें, घबराहट से हृदय गति तेज चलने से रक्त संचरण तेज हो जायेगा ओर जहर सारे शरीर में जल्द फैल जायेगा। बर्फ अथवा गर्म पदार्थ का इस्तेमाल काटे गये स्थान पर न करें। काटे गये स्थान पर चीरा न लगाए। सर्प से प्रभावित व्यक्ति के कटे स्थान पर टुर्निकेट न बाधें। इससें संबंधित अंग की क्षति हो सकती हैं। मुह से कटे हुए स्थान को न चुसें। मंत्र या तात्रिंक के झांसे में न आयें
भय एवं चिन्ता न करें सभी सॉप जहरीले नहीं होते है। सभी जहरीले सॉपों के पास हर समय पूरा जहर नही होता अगर पूरा जहर हो तो भी वो इसका लिथल डोज हमेशा प्रवेश नहीं करा पातें है*। तुरंत निकटतम सरकारी अस्पाताल ले जाए। किसी भी सहायता के लिए एम्बुलेंस-108, पुलिस-100/112, नम्बरों पर
सम्पर्क कर सकते हैं।

