
📰 विलेज फास्ट टाइम्स – कुशीनगर
31 अक्टूबर 2025, कुशीनगर से विशेष रिपोर्ट
कुशीनगर कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक एक बार फिर प्रशासनिक सतर्कता और विभागीय लापरवाही के टकराव का मंच बन गई।
बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने की, जबकि उनके साथ पुलिस अधीक्षक केशव कुमार भी मौजूद रहे।
बैठक की शुरुआत में ही जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा — “सड़क सुरक्षा केवल औपचारिक बैठक का विषय नहीं, बल्कि जनजीवन से जुड़ा दायित्व है। यदि विभाग लापरवाह रहे तो जवाबदेही तय होगी।”
यह वक्तव्य सुनते ही अधिकारियों के चेहरे पर गंभीरता उतर आई।
🚧 एनएच किनारे जलनिकासी पर बरसे डीएम
डीएम तंवर ने एनएच विभाग के सहायक अभियंता को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि तमकुही, हाटा और अन्य स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से आम जनता को भारी असुविधा हो रही है। बरसात के समय तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब सड़क किनारे जमा पानी दुर्घटनाओं का कारण बन जाता है।
उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि — “एनएचआई तत्काल स्थानीय निकायों से समन्वय कर निकासी हेतु ठोस कार्ययोजना बनाए, और आगामी बैठक में उसकी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करे।”
डीएम ने ईओ तमकुही, हाटा एवं अन्य नगर निकायों के अधिकारियों को भी धारा 133 सीआरपीसी (सार्वजनिक उपद्रव निवारण) का हवाला देते हुए सचेत किया कि यदि जलनिकासी की समस्या से आमजन को हानि पहुँचती है, तो उसे “सार्वजनिक उपद्रव” मानते हुए व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।
🚌 अनफिट स्कूल वाहनों पर चला प्रशासनिक कोड़ा
बैठक में स्कूल वाहनों की फिटनेस पर विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने दो टूक कहा — “अनफिट स्कूल वाहनों का संचालन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।”
उन्होंने परिवहन विभाग और पुलिस को निर्देशित किया कि जिन वाहनों की फिटनेस समाप्त हो चुकी है, या जिनमें सुरक्षा उपकरण (फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर, सीट बेल्ट आदि) नहीं हैं, उन पर तत्काल प्रवर्तन कार्यवाही की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे वाहन किसी भी विद्यालय से जुड़े पाए गए तो विद्यालय प्रबंधक या प्रधानाचार्य के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
🛑 सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा, विभागों की जवाबदेही तय
यातायात निरीक्षक ने पिछली माह हुई सड़क दुर्घटनाओं का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। रिपोर्ट में यह पाया गया कि अधिकतर हादसे ओवरस्पीडिंग, लापरवाही से वाहन मोड़ने, तथा अंधेरी सड़कों पर स्ट्रीट लाइट की कमी के कारण हुए।
इस पर जिलाधिकारी ने पीडब्ल्यूडी, परिवहन, एनएचएआई, और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सड़क सुरक्षा से जुड़ी कमियों को प्राथमिकता पर दूर करें।
उन्होंने कहा — “किसी सड़क पर गड्ढा हो, अंधेरा हो, या जलभराव हो — इन सभी कारणों से यदि जान जाती है, तो यह केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि विभागीय अपराध है।”
🚦 सख्त निगरानी तंत्र की मांग
डीएम तंवर ने सुझाव दिया कि हर विकासखंड स्तर पर सड़क सुरक्षा समिति का गठन किया जाए, जिसमें पुलिस, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि शामिल हों।
उन्होंने कहा कि ऐसी समितियां न केवल सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन कराएंगी, बल्कि स्कूलों, बाजारों और मुख्य मार्गों पर “रोड सेफ्टी अवेयरनेस ड्राइव” भी चलाएंगी।
👥 व्यापक सहभागिता – स्कूलों और विभागों ने लिया संकल्प
बैठक में सीओ ट्रैफिक, यात्रीकर एवं मालकर अधिकारी, पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता, परिवहन निगम के निरीक्षक, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एनएचएआई के अधिकारी, नगर निकायों के ईओ, तथा जनपद के समस्त विद्यालयों के प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।
सभी ने एकस्वर में कहा कि सड़क सुरक्षा जनजागरूकता और कड़े प्रवर्तन से ही सुनिश्चित हो सकती है।
✍️ “सुरक्षा का सिस्टम नहीं, संवेदना चाहिए”
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बैठक का समापन करते हुए कहा —
“सड़क सुरक्षा कानून का विषय जरूर है, पर इसे लागू करने के लिए संवेदनशीलता की आवश्यकता है। हर विभाग को यह समझना होगा कि एक गड्ढा, एक टूटी लाइट, या एक अनफिट वाहन – किसी की जिंदगी छीन सकता है। प्रशासन की जिम्मेदारी केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी सुधार दिखना चाहिए।”
बैठक का माहौल स्पष्ट संकेत दे गया कि अब कुशीनगर प्रशासन सड़क सुरक्षा को गंभीरता से ले रहा है, और आने वाले दिनों में लापरवाह विभागों के प्रति कार्रवाई निश्चित है।


