
कुशीनगर। दुदही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर सोमवार को गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए बुलाए जाने के बाद वापस लौटा दिए जाने का मामला सामने आया है। आशा बहुओं का कहना है कि संगिनी उन पर बार-बार दबाव बनाती है कि गर्भवती महिलाओं को सीएचसी लेकर आएं। लेकिन जब वे महिलाओं को जांच के लिए ले आती हैं तो सीएचसी के बीपीएम गौरव श्रीवास्तव उन्हें उल्टे फटकार लगाते हुए कहते हैं कि “क्यों लेकर आती हो” और कई बार दफ्तर से भगा भी देते हैं। इसी को लेकर आशाओं और बीपीएम में कई बार विवाद की स्थिति बन चुकी है।
आज भी बांसगांव, पड़रौन, चिरकूटहां, शुकलही, अमवा दीगर और पृथ्वीपुर समेत कई गांवों से आईं गर्भवती महिलाएं जांच के बिना लौटा दी गईं। इनमें नंदनी चौबे पत्नी प्रद्युम्न चौबे, तैमूल निशा पत्नी फिरोज, रीना देवी पत्नी राजेश पटेल, रेशमी देवी पत्नी राजेश शर्मा, नाजिया खातून पत्नी कयामुद्दीन अंसारी, अफसाना खातून पत्नी अफजल अंसारी, नीलम देवी पत्नी नंदलाल भारती, उर्मिला देवी, रेशमा खातून, अल्का देवी, अमरुल खातून, उमापति पत्नी अंगेश चौधरी, ममता देवी पत्नी नरेंद्र यादव, चम्पा देवी पत्नी अकलु, ज्ञाती देवी पत्नी उत्तम प्रसाद, अनिता देवी पत्नी इंद्रजीत कुशवाहा और पलक देवी पत्नी विनोद शामिल रहीं।
इन महिलाओं को गर्भावस्था संबंधी नियमित जांच के लिए सीएचसी लाया गया था, लेकिन उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। आशाओं का आरोप है कि बार-बार ऐसे हालात बनते हैं जिससे गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वहीं इस पूरे मामले पर सीएचसी दुदही के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप कुमार ने कहा कि आशाओं और महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी गर्भवती महिलाओं को एसएमएस आने के बाद ही जांच के लिए आने को कहा गया है, ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।
यह विवाद अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आशाओं का कहना है कि अगर इस तरह गर्भवती महिलाओं को बार-बार लौटाया जाएगा तो उनकी और मरीजों की परेशानी बढ़ेगी।
