

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
नगर पंचायत दुदही — विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
नगर पंचायत दुदही, जनपद कुशीनगर में दिनांक 27 दिसम्बर 2025को महा हिन्दू सम्मेलन का ऐसा भव्य आयोजन हुआ जिसने पूरे क्षेत्र का वातावरण धर्म, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना से गुंजायमान कर दिया। सम्मेलन में उमड़ी भीड़ और प्रभावशाली उद्बोधन ने यह संकेत दे दिया कि जब हिन्दू समाज संगठित रूप से खड़ा होता है, तो उसकी आवाज़ केवल मंच तक सीमित नहीं रहती — वह व्यवस्थाओं को भी सजग होने का संदेश देती है।
विश्व हिन्दू परिषद की पूर्व सहभागिता वाले इस सम्मेलन में सबसे पहले मातृशक्ति जिला संयोजिका सरोज जी ने कुटुम्ब प्रबोधन पर अपने विचार रखते हुए कहा कि “परिवार टूटते हैं तो समाज बिखरता है, और समाज बिखरता है तो राष्ट्र कमज़ोर पड़ता है” — उनके इस संदेश ने सभागार में उपस्थित प्रत्येक परिवार को आत्ममंथन का अवसर दिया।
इसके बाद दुर्गा वाहिनी जिला संयोजिका करिश्मा जी ने संगठन के उद्देश्य व उपयोगिता पर प्रभावी व्याख्यान देते हुए कटाक्ष किया —
“नारी को जितना कमज़ोर समझने की भूल की गई, समाज ने उतना ही मूल्य चुकाया… अब समय बदलने का नहीं, समय बदल देने का है।”
संत रामनयन दास जी ने हिन्दू एकता और संस्कार पर जोर देते हुए कहा कि “संस्कारों की लौ यदि घर-घर में जले तो समाज को दिशा देने के लिए किसी आदेश की आवश्यकता नहीं पड़ती।” उनका यह संदेश मानो व्यवस्था को आईना दिखाता प्रतीत हुआ — कि असंस्कृति का समाधान कानून से पहले समाज की एकजुटता में निहित है।
सम्मेलन का मुख्य उद्बोधन विभाग प्रचारक श्रीमान दीपक जी ने दिया, जिनकी वाणी में तेवर भी था और चेतावनी भी —
“व्यवस्था तभी तक निर्भय है जब तक समाज मौन है; और जब समाज जागता है तो प्रशासन भी सजग होकर धर्म और न्याय के मार्ग पर चलता है।”
कार्यक्रम की सफलता में प्रखण्ड कार्यवाह जितेन्द्र जी, प्रखण्ड संचालक अमर जी, संजय जी, संजय राय जी, धीरज जी, श्रीराम जी सहित अनेक स्वयंसेवकों की तत्परता रही। विद्यार्थी परिषद से रामप्रताप जी, रंजीत जी, दीपक जी की उपस्थिति और सक्रियता सम्मेलन की ऊर्जा का प्रमुख आधार रही।
वहीं विश्व हिन्दू परिषद से जिला मंत्री सुरेन्द्र जी, जिला सहमंत्री माणिक्य जी, जिलाअर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख अजय जी, जिला धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख वेदप्रकाश जी, जिला कोषाध्यक्ष पारसनाथ जी, दुदही प्रखण्ड अध्यक्ष गौरव जी, तथा बजरंग दल सह संयोजक राजगौरव जी की उपस्थिति ने संकेत दिया कि हिन्दू समाज में संगठन की जड़ें गहरी हैं और समय आने पर ये जड़ें वटवृक्ष बनकर संरक्षण भी देती हैं और दिशा भी।
मातृशक्ति और दुर्गा वाहिनी की बहनों की सशक्त भागीदारी ने कार्यक्रम को ऊर्जावान और अनुशासित बनाया।
सभा का संचालन दुर्गेश जी ने धारदार अंदाज़ में किया। समापन में अध्यक्ष डॉ. प्रेम नारायण गुप्ता जी ने सभी को धन्यवाद देते हुए कहा —
“धर्म की आवाज़ जब सजग समाज से मिलती है, तो प्रशासन भी केवल नियम नहीं, न्याय को प्राथमिकता देने लगता है — दुदही का यह सम्मेलन उसी बदलाव की चेतावनी है।”
दुदही में सम्पन्न यह महा हिन्दू सम्मेलन केवल आयोजन नहीं —
एक घोषणा थी, एक संदेश था, और एक संकेत था कि संगठित समाज नीतियों का निर्माण नहीं मांगता… वह मार्ग स्वयं प्रशस्त करता है।












