
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर—
ट्रेड आस्था इन्फ्रा प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड पर बड़े धोखाधड़ी के गंभीर आरोप, निवेशकों में हड़कंप, जांच की मांग तेज।
कुशीनगर। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद गोरखपुर और उसके आसपास के जिले—कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज—इन दिनों ठग गिरोहों के गढ़ में बदलते दिख रहे हैं। खासकर वह विवादित कंपनी ट्रेड आस्था इन्फ्रा प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसने निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये बटोरकर सैकड़ों परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी। कंपनी की करतूतें ऐसी कि लोगों ने जमा पूंजी गंवाई, घर के गहने दांव पर लगाए और आज सड़क पर खड़े होकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

आरोप बेहद गंभीर हैं—कंपनी के संचालक विश्वजीत श्रीवास्तव और उसके सहयोगियों ने लोगों को शेयर बाजार, गोल्ड ट्रेडिंग और रियल एस्टेट में हर महीने 10 से 12 फीसदी मुनाफे का लालच देकर मोटा निवेश करवा लिया। पहले कुछ महीनों तक मुनाफा देकर ‘भरोसे का जाल’ बुना गया, लेकिन जब रकम वापस मांगने का समय आया तो दफ्तर बंद, फोन स्विच ऑफ और कंपनी के सभी बड़े अधिकारी फरार!
निवेशकों ने जब दफ्तर के बाहर ताला लटका देखा तो समझते देर न लगी कि करोड़ों की ठगी का खेल पूरा हो चुका है।
एक नहीं, तीन-तीन कंपनियां… ठगी का पूरा साम्राज्य
पीड़ितों का कहना है कि निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए जालसाजों ने सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन कंपनियां खड़ी कीं—
आस्था इन्फ्रा प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड
आस्था रिटेलर्स प्राइवेट लिमिटेड
आस्था जेम्स एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड
इन कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये का खेल खेला गया। निवेशकों को बताया जाता था कि कंपनी लखनऊ और गोरखपुर में रियल एस्टेट की बड़ी परियोजनाएं चला रही है। देवा रोड, लखनऊ और राप्तीनगर, गोरखपुर की कथित परियोजनाओं की तस्वीरें, वीडियो, नक्शे और दस्तावेज दिखाकर लोगों को यकीन दिलाया जाता था कि उनका पैसा सुरक्षित है और बढ़ रहा है।
लेकिन हकीकत यह थी कि यह सारे दस्तावेज महज ‘दिखावा’ थे—पैसा गायब, प्रोजेक्ट गायब और कंपनी के संचालक भी गायब!

जैसे-जैसे निवेश बढ़ता गया, वैसे-वैसे कंपनी का झांसा भी गहराता गया
चार-पांच महीने मुनाफा दिया गया, ताकि लोग और पैसे लगाते रहें। लेकिन फिर अचानक भुगतान रोक दिया गया। निवेशकों ने जब अपने दिए चेक बैंक में लगाए तो वह बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी के दफ्तरों में ताले लग गए, मोबाइल बंद हो गए और कंपनी के संचालकों की ‘लापता’ होने की कहानी शुरू हो गई।
थाने में सुनवाई न होने से मायूस निवेशक एसएसपी गोरखपुर की चौखट पर पहुंचे। शिकायत के बाद शाहपुर पुलिस ने केस दर्ज किया और जांच शुरू की।
कई जिलों में शिकायतें—ठगी का नेटवर्क पूरे पूर्वांचल में फैला
लखनऊ के रामनरेश यादव, जौनपुर के दिनेश यादव, बलिया के अरुण कुमार यादव, केराकत के सुनील यादव समेत दर्जनों निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई है। वहीं गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज के सैकड़ों पीड़ित ऐसे भी हैं जो अभी भी डर के कारण शिकायत नहीं कर रहे, इस उम्मीद में कि शायद बिना केस किए पैसा वापस मिल जाए।
लेकिन अब मामला इतना बड़ा हो चुका है कि पुलिस भी इसे एक ‘मेगा फ्रॉड केस’ मानकर गंभीर धाराओं में जांच कर रही है। गोरखपुर पुलिस ने कंपनी से जुड़े बैंक खातों, लेनदेन और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि जल्द ही आरोपी गिरफ्त में होंगे।
गोरखपुर और लखनऊ में पहले से कई मुकदमे दर्ज
आस्था ट्रेडिंग कंपनी के निदेशक विश्वजीत श्रीवास्तव के खिलाफ गोरखपुर के शाहपुर और लखनऊ थाने में पहले से चार मुकदमे दर्ज हैं।
इधर हाल ही में देवरिया के तीन लोगों से 19.51 लाख की ठगी के मामले में एक नई एफआईआर दर्ज की गई है।
एसएसपी के आदेश पर गुलरिहा पुलिस ने विश्वजीत श्रीवास्तव, नवीन श्रीवास्तव, चंदन शर्मा, फैजल और अविनाश सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं—धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और धमकी—में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है।
सबसे बड़ी चर्चा—क्या सरगना विश्वजीत विदेश भागने की फिराक में?
चर्चा है कि ठगी के इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड विश्वजीत श्रीवास्तव अब कानून के लंबे हाथों से बचने के लिए देश छोड़कर विदेश भागने की तैयारी में है।
निवेशकों की करोड़ों की गाढ़ी कमाई लेकर फरार यह गिरोह अब पुलिस के रडार पर है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या योगी की पुलिस इस ठग साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए चक्रव्यूह रचकर सरगना को पकड़ पाती है या फिर यह मास्टरमाइंड विदेश की ओर रवाना हो जाएगा।
विलेज फास्ट टाइम्स आगे भी इस ठगी के पूरे नेटवर्क की परतें खोलता रहेगा।
