


भोर से पहले की अँधेरी रात… हल्की ठंड और घाटों पर उमड़ती आस्था की अनगिनत परछाइयाँ…
कहीं दूर से चमकती दीपों की कतार… और उन जलते दीपों के बीच दुआओं की गूंज…
यही है छठ —
सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, विश्वास की सबसे उजली लौ। और इसी आस्था की रक्षा के लिए…
इसी भरोसे के आसमान को सुरक्षित रखने के लिए… कुशीनगर पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है।
आज पूरी रात… घाटों पर सिर्फ भीड़ नहीं होगी, भीड़ के पीछे खड़ी होगी वो ताकत — वर्दी में विश्वास, ड्यूटी में समर्पण, और आस्था की सुरक्षा में समर्पित कुशीनगर पुलिस।
पुलिस अधीक्षक श्री केशव कुमार के निर्देशन में, जिले के हर सर्किल, हर घाट, हर तट पर सुरक्षा के पहरे कड़े कर दिए गए हैं। घाट का हर मोड़, हर सीढ़ी, हर रास्ता… बारीकी से परखा जा चुका है। जलस्तर कहाँ तक है… संभावित खतरे कहाँ हो सकते हैं… रोशनी किन बिंदुओं पर और तेज़ होनी चाहिए… भीड़ किस दिशा में बढ़ेगी… और आपातकाल में रास्ता किस तरफ खुलेगा — हर संभावना पहले ही पढ़ ली गई है, जैसे कोई सैनिक युद्ध से पहले नक्शे का हर इंच याद कर ले।
चकित मत होएँ… यह उत्सव जितना पावन है, उतना ही संवेदनशील भी।
और इसलिए — आज न कोई लापरवाही चलेगी, न कोई लापता व्यवस्था।
घाटों पर तैनात हर पुलिसकर्मी को आदेश है — “सतर्क रहो, संयम रखो, और श्रद्धालुओं की सुरक्षा तुम्हारी पहली जिम्मेदारी है।”
भीड़ बढ़ेगी… आवाज़ें उठेंगी… बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग — हजारों कदम घाटों की ओर बढ़ेंगे… लेकिन व्यवस्था डगमगाए, ऐसा नहीं होगा। क्योंकि ट्रैफिक से लेकर भीड़ प्रबंधन तक, हर मोर्चे पर पुलिस तैनात है — मजबूत, चौकन्नी और तत्पर।
और उस भीड़ के बीच… एक और चुनौती है — सोशल मीडिया का शोर।
त्योहारों में कभी-कभी एक अफवाह, एक भड़काऊ पोस्ट, एक गलत मैसेज… भीड़ से भी खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए स्पष्ट अपील है —
“सोशल मीडिया पर संयम रखें, अफवाह न फैलाएं। कुछ संदिग्ध दिखे? 112 पर तुरंत सूचना दें। पुलिस आपकी है… और आपके साथ खड़ी है।”
साफ-सफाई, लाइट, बैरिकेडिंग, रूट डायवर्जन, कंट्रोल रूम, पावर बैकअप, ड्रोन मॉनिटरिंग, नावों की गश्त, महिला सुरक्षा— हर स्तर पर एक ही लक्ष्य है —
छठ पर कोई व्यवधान नहीं… किसी श्रद्धालु की आस्था में कोई आंच नहीं… और हर व्रती तक सुरक्षा का भरोसा पहुँचे।
क्योंकि पुलिस जानती है —
यह व्रत सिर्फ परंपरा नहीं, पीढ़ियों की आस्था है।
यह घाट सिर्फ सीढ़ियाँ नहीं, भावनाओं का तीर्थ है।
यह दीप सिर्फ लौ नहीं, उम्मीद की रोशनी है।
और जब उम्मीद की लौ जलती है… तो सुरक्षा की दीवार को और मजबूत होना पड़ता है।
इसलिए आज रात कुशीनगर के घाटों पर नींद सिर्फ श्रद्धालुओं की होगी… पुलिस की नहीं।
नींद सिर्फ घरों में होगी… चौकसी घाटों पर।
हर वर्दी… हर कदम… हर वायरलेस संदेश… एक ही मिशन पर है —
“छठ महापर्व — सकुशल, शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण।”
तो आज, इस पवित्र अवसर पर… प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहा है, और जनता से एक ही निवेदन है —
सहयोग करें, संयम रखें, नियम मानें, और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनें।
आस्था की यह रात, शांति की सुबह लेकर आए —
यही संकल्प… यही प्रण… यही पहरा… और यही विश्वास।
कुशीनगर पुलिस — वर्दी में जागती वो ताकत,
जो आपके त्योहार को सुरक्षित रखेगी।
जय छठ मइया।
और सभी श्रद्धालुओं को इस पावन महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।







