



20 मार्च, विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
कुशीनगर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अब केवल आदेशों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीनी हकीकत पर भी नजरें गड़ाए हुए है। मा० सुप्रीम कोर्ट एवं शासन के निर्देशों के अनुपालन में आज एआरटीओ कार्यालय, रविंद्रनगर में विशेष जांच कैंप का आयोजन कर यह साफ संकेत दे दिया गया कि अब लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एआरटीओ मो० अजीम के निर्देशन में सुबह 08:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक चले इस अभियान में कुल 130 स्कूली वाहनों की गहन भौतिक एवं तकनीकी जांच की गई। साथ ही, 130 चालकों व परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें स्वास्थ्य कार्ड भी जारी किए गए। प्रशासनिक सक्रियता का यह चेहरा सराहनीय जरूर है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि आखिर अब तक यह सख्ती क्यों नहीं दिखी?
जांच के दौरान 125 वाहन तो मानकों पर खरे उतरे, लेकिन 5 वाहन ऐसे मिले जो सुरक्षा मानकों से कोसों दूर थे। इन वाहनों को 15 दिनों के भीतर सुधारने का अल्टीमेटम दिया गया है। हालांकि, यह भी एक गंभीर प्रश्न है कि जो वाहन बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे थे, वे अब तक सड़कों पर कैसे दौड़ रहे थे?
अधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जनमानस में यह चर्चा भी तेज है कि क्या यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा या वाकई लगातार निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी?
कुल मिलाकर, यह कार्रवाई प्रशासन की सक्रियता का संकेत जरूर देती है, पर साथ ही यह भी याद दिलाती है कि सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर समय-समय पर नहीं, बल्कि लगातार और सख्त निगरानी ही असली समाधान है।
