
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में वर्षों से पल रहा ‘आउटसोर्सिंग राज’ आखिरकार शासन के बुलडोज़र के नीचे आता नजर आ रहा है। जिस व्यवस्था को अब तक “सिस्टम की मजबूरी” बताकर ढका जा रहा था, उस पर अब सीधे प्रहार हुआ है। शिक्षा निदेशक के सख्त आदेश ने यह साफ कर दिया है कि अब नियमों को जेब में रखकर दफ्तर चलाने वालों के दिन लद चुके हैं।
मामला आउटसोर्सिंग कर्मचारी सर्वेश्वर तिवारी उर्फ सोनू तिवारी का है, जो कागजों में तो पडरौना के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में ‘ऑफिस ब्वाय’ हैं, लेकिन हकीकत में डीआईओएस कार्यालय में ‘बाबू’ की भूमिका निभाते रहे। फाइलों से लेकर गोपनीय दस्तावेजों तक उनकी पहुंच ने लंबे समय से सवाल खड़े किए, मगर जिम्मेदारों ने आंखें मूंदे रखना ही बेहतर समझा। सवाल सीधा है—क्या बिना संरक्षण के यह संभव था?

शिक्षक संघ ने जब इसे “नियमों की हत्या” बताया और आंदोलन की चेतावनी दी, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा मांगी गई रिपोर्ट तक को नजरअंदाज किया जाना इस बात का संकेत था कि दफ्तर में नियम नहीं, ‘रसूख’ चलता है। लेकिन इस बार मामला ऊपर तक पहुंच गया और शिक्षा निदेशक ने सीधे हस्तक्षेप कर खेल पलट दिया।
अब आदेश साफ है—तत्काल हटाओ। लेकिन असली सवाल अभी बाकी है—क्या सिर्फ एक कर्मचारी हटाने से पूरा खेल खत्म हो जाएगा? या फिर यह सिर्फ “बलि का बकरा” बनाकर बड़े खिलाड़ियों को बचाने की कोशिश है?
सूत्रों की मानें तो जांच की आंच अब उन चेहरों तक पहुंच सकती है, जो पर्दे के पीछे से इस ‘अनौपचारिक व्यवस्था’ को हवा देते रहे। अगर आदेश का पालन नहीं हुआ, तो कार्रवाई की तलवार अधिकारियों पर भी लटकना तय है।
शासन का यह कदम एक संदेश है—अब ‘जुगाड़ तंत्र’ नहीं चलेगा। लेकिन कुशीनगर में लोग पूछ रहे हैं—क्या यह कार्रवाई सच में सिस्टम बदलेगी, या फिर कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा?
