

📰 विलेज फास्ट टाइम्स – ब्यूरो लखनऊ
लखनऊ। यूपी पुलिस की साख को एक बार फिर “फाइल के पन्नों” में दफन कर देने वाली घटना सामने आई है। महानगर कोतवाली के पेपरमिल चौकी इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर धनंजय सिंह का रिश्वत लेते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है — और सच कहें तो दो लाख रुपये के नोट देखते ही दरोगा जी के चेहरे पर जो चमक आई, वह किसी त्योहार की रौशनी जैसी लग रही थी!
वीडियो में साफ दिख रहा है कि धनंजय सिंह बेहद निपुणता से “गांधी जी” को हाथों में लेने से बचते हैं, फाइल के बीच में बड़ी सावधानी से रखते हैं और फिर किनारे सरका देते हैं — मानो कोई “ऑफिस प्रोसीजर” पूरा कर रहे हों। पर ये फाइल अब उनके करियर की सबसे भारी साबित हुई।
दरअसल, यह पूरा मामला एक गैंगरेप केस में नाम हटाने के सौदे से जुड़ा था। सूत्रों के मुताबिक, दरोगा ने आरोपी पक्ष से 50 लाख रुपये की डील का संकेत दिया था। आखिरकार 2 लाख रुपये पर सौदा तय हुआ — लेकिन ये रकम थी एंटी करप्शन टीम के बिछाए जाल की। शिकायतकर्ता प्रतीक गुप्ता ने सारी बातें दर्ज कराई थीं, जिसके बाद टीम ने चौकी परिसर के अंदर ही दरोगा को रंगे हाथ पकड़ लिया।
वीडियो के वायरल होते ही लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की कार्यशैली पर सवालों की बौछार शुरू हो गई। लोग कह रहे हैं — “जब चौकी इंचार्ज ही नोटों की फाइल संभाल रहे हों, तो जनता अपनी फरियाद किसे सौंपे?”
फिलहाल एंटी करप्शन टीम ने धनंजय सिंह को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर उस सवाल को जिंदा कर दिया है — क्या वर्दी की गरिमा अब सिर्फ यूनिफॉर्म तक सीमित रह गई है?
