
नई दिल्ली/मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन दिनों माहौल बदल रहा है — सड़कों पर अब “रोटी, बिजली और आज़ादी” के साथ-साथ “भारत से जुड़ो” के नारे भी गूंज रहे हैं। आम जनता, व्यापारी, और युवा वर्ग खुलेआम पाकिस्तान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। लंबे समय से आर्थिक बदहाली, भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों से परेशान लोग अब नया भविष्य भारत में देख रहे हैं।
बीते कुछ महीनों में पीओके के कई इलाकों — मुजफ्फराबाद, कोटली और मीरपुर — में जबरदस्त प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों में जनता ने साफ कहा है कि पाकिस्तान से मिले केवल धोखे और अभाव, जबकि भारत में दिखता है विकास और सम्मान का रास्ता। इस जनभावना को लेकर भारत की ओर से भी संकेत मिल चुके हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा था, “पीओके के लोग जल्द ही खुद भारत से जुड़ने की मांग करेंगे।” अब यह बयान केवल राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि हकीकत में बदलता परिदृश्य प्रतीत हो रहा है। पाकिस्तान सरकार की विफलता और भारत की सशक्त छवि ने वहां के लोगों के दिलों में उम्मीद की किरण जगा दी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ भूगोल का नहीं, बल्कि दिलों का मिलन बनने की ओर बढ़ता संकेत है। जहां पहले गोलियों की गूंज थी, वहां अब विकास और लोकतंत्र की पुकार सुनाई दे रही है। “हुंकार-ए-कश्मीर” अब नई कहानी लिख रही है — एक ऐसे कश्मीर की, जो पाकिस्तान के साए से निकलकर भारत की गोद में आने को बेताब है।
