

🔴 कुशीनगर में पूर्ति निरीक्षक ने ठेंगा दिखाया सीएम के आदेश को
🔴 15 दिन से कार्डधारक परेशान… पूर्ति कार्यालय का लगा रहे चक्कर
🔴 10 से 12 बजे तक दफ्तर से गायब रहते पूर्ति निरीक्षक
🔴 धूप और गर्मी में खड़े होकर त्रस्त रहे दर्जनों लाभार्थी
🔴 तमकुहीराज तहसील परिसर का मामला… कार्रवाई की उठी मांग
कुशीनगर जनपद के तमकुहीराज तहसील परिसर में स्थित पूर्ति कार्यालय इन दिनों उपेक्षा और अव्यवस्था का केंद्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट आदेश हैं कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी जनता दर्शन और समस्याओं के समाधान के लिए नियमित रूप से समय पर कार्यालय में उपस्थित रहें। लेकिन पूर्ति निरीक्षक इन आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं।
कार्यालय का हाल यह है कि सुबह 10 बजे से 12 बजे तक, जब आमतौर पर कार्डधारक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आते हैं, पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में मौजूद ही नहीं रहते। नतीजा यह होता है कि दर्जनों कार्डधारक धूप और गर्मी में लंबे समय तक बाहर खड़े होकर इंतजार करने को मजबूर हो जाते हैं।
पिछले 15 दिनों से यही स्थिति बनी हुई है। लाभार्थी बार-बार पूर्ति कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। राशन कार्ड से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ, जैसे—नाम जोड़ना, हटाना, आधार लिंक, वितरण से संबंधित शिकायतें—सब अधर में लटकी हुई हैं।
कार्यालय में पहुंचे कुछ कार्डधारकों ने बताया कि कई बार सुबह से लेकर दोपहर तक इंतजार करने के बावजूद निरीक्षक नहीं मिलते। इससे नाराज कार्डधारकों ने आरोप लगाया कि पूर्ति निरीक्षक जनता के समय और परेशानी की कोई परवाह नहीं करते। वहीं, कर्मचारियों की लापरवाही के कारण आमजन को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद यदि तहसील परिसर में बैठा अधिकारी ही नियमों की अनदेखी करेगा तो नीचे स्तर के कर्मचारी भी मनमानी करेंगे। जनता की मांग है कि जिला प्रशासन इस मामले में तत्काल संज्ञान ले और पूर्ति निरीक्षक पर कार्रवाई सुनिश्चित करे।
इस तरह की लापरवाही से न केवल सरकार की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद कार्डधारक, जिनकी रोज़ी-रोटी का सीधा संबंध सार्वजनिक वितरण प्रणाली से है, वे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
कुल मिलाकर तमकुहीराज तहसील परिसर में स्थित पूर्ति कार्यालय का मामला यह साबित करता है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी ही अपनी जिम्मेदारियों से भागेंगे, तो जनता दर्शन महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
