
विलेज फास्ट टाइम्स ब्यूरो | कुशीनगर
कुशीनगर जिले की नगर पालिका परिषद पडरौना इन दिनों जबरदस्त सियासी और प्रशासनिक हलचल के केंद्र में है। नगर के कई सभासदों ने नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (ईओ) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभासदों का आरोप है कि नगर पालिका के गठन के लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद शहर में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो सके हैं, जबकि केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से विकास योजनाओं के लिए समय-समय पर पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाता रहा है।
सभासदों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर बजट का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि पुराने कार्यों को दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग और बंदरबांट का खेल चल रहा है, जिसमें नगर पालिका अध्यक्ष और ईओ की मिलीभगत बताई जा रही है। उनका यह भी कहना है कि बोर्ड की बैठकों में उनसे केवल औपचारिक हस्ताक्षर कराए जाते हैं, लेकिन वास्तविक निर्णयों और खर्चों की जानकारी साझा नहीं की जाती।
नगर के असंतुष्ट सभासदों ने इन आरोपों को लेकर एकजुट होकर नई समिति के गठन की मांग तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि एक-तिहाई से अधिक सभासदों ने इस संबंध में मंडलायुक्त गोरखपुर, जिलाधिकारी कुशीनगर और नगर विकास मंत्री तक शिकायतें भेजकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। सभासदों का दावा है कि कई स्तरों से उनके पक्ष में आदेश और पत्र भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन उनका अनुपालन कराने में प्रशासनिक स्तर पर अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
इसी बीच 28 फरवरी को नगर पालिका पडरौना में बोर्ड की बैठक बुलाई गई, जो पर्यवेक्षक की निगरानी में आयोजित हुई। सभासदों का आरोप है कि बैठक के दौरान भी जारी आदेशों की खुलेआम अनदेखी की गई और नगर अध्यक्ष प्रशासनिक निर्देशों की धज्जियां उड़ाते नजर आए।
हालांकि पूरे मामले पर जिलाधिकारी कुशीनगर की ओर से पुनः कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। अब नगर की जनता और जनप्रतिनिधियों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या शासन-प्रशासन के आदेशों का पालन कराया जाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
नगर पालिका पडरौना में उठे इस विवाद ने स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर विवाद को किस तरह सुलझाता है और नगर के विकास को नई दिशा देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
