
1️⃣ आलमगीर के आवास और ऑफिस पर जांच
आलमगीर के आवास व ऑफिस पर आयकर टीम की 16 घंटे तक सघन छापेमारी, दस्तावेज खंगाले, लेन-देन की गहन जांच।
2️⃣ पांच लाख से अरबों का साम्राज्य
पांच लाख से शुरू हुआ कारोबार बना अरबों का एम्पायर, आयकर छापे में तेज हुई काली कमाई की पड़ताल।
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर

कभी नकली नोट, कभी धर्मांतरण तो कभी दुष्कर्म जैसे संगीन आरोपों को लेकर चर्चा में रहने वाले रेडहिल रियल एस्टेट कंपनी के मालिक आलमगीर अंसारी एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में आ गए हैं। इस बार वजह है आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई। मंगलवार की सुबह एक साथ आलमगीर के आवास और कसया स्थित रेडहिल रियल एस्टेट कार्यालय पर आयकर विभाग की टीम ने छापा मारकर करीब सोलह घंटे तक सघन जांच-पड़ताल की। इस कार्रवाई ने न सिर्फ जिले बल्कि पूरे पूर्वांचल में हलचल मचा दी है।
सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग को रेडहिल रियल एस्टेट के वित्तीय लेन-देन, आय के स्रोत और टैक्स भुगतान को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर यह छापेमारी की गई, जिसमें टैक्स चोरी के बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है। हालांकि आयकर विभाग की टीम ने पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा है और मीडिया से दूरी बनाए रखी है, लेकिन बाजार से लेकर गांव-चौराहों तक इस छापे की चर्चा जोरों पर है।
बताया जाता है कि मंगलवार सुबह करीब आठ बजे आयकर विभाग की टीम भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आलमगीर अंसारी के घर और ऑफिस पहुंची। टीम ने मौके पर मौजूद आलमगीर, उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए और घंटों तक दस्तावेजों, कंप्यूटर सिस्टम व फाइलों को खंगालती रही। देर रात तक चली इस कार्रवाई के दौरान किसी को भी बाहर-अंदर आने-जाने की अनुमति नहीं दी गई।
आलमगीर अंसारी का सफर खुद में कई सवाल खड़े करता है। बिहार के गोपालगंज जिले का निवासी आलमगीर कभी जमीन की दलाली कर कमीशन के सहारे अपनी रोजी-रोटी चलाता था। वर्ष 2019 में उसने अपने गांव की एक जमीन बेचकर महज पांच लाख रुपये जुटाए और 2020 में रेडहिल रियल एस्टेट कंपनी की नींव रखी। इसके बाद जो हुआ, उसने हर किसी को चौंका दिया। महज पांच वर्षों के भीतर पांच लाख से शुरू हुआ कारोबार अरबों के एम्पायर में तब्दील हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपनी की स्थापना के दो वर्ष बाद ही आलमगीर के पास मानो पैसों की बारिश होने लगी। जिले के अलग-अलग इलाकों में प्लाटिंग, जमीन की खरीद-फरोख्त और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के नाम पर रेडहिल कंपनी का तेजी से विस्तार हुआ। देखते-ही-देखते आलमगीर एक साधारण दलाल से अरबपति कारोबारी बन गया। यही वजह है कि उसकी इस ‘फर्श से अर्श’ की यात्रा को लेकर आम लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।
बीते माह विलेज फास्ट टाइम्स और लखनऊ से प्रकाशित कुछ समाचार पत्रों ने “जमीन की दलाली से लेकर कंपनी मालिक बनने तक आलमगीर का सफर” शीर्षक से खबर प्रकाशित कर कई सवाल खड़े किए थे। खबर में यह भी बताया गया था कि प्लाटिंग से पहले कृषि भूमि को आवासीय भूमि में परिवर्तित कराना अनिवार्य है। सवाल यह है कि क्या रेडहिल रियल एस्टेट कंपनी ने हर जगह इस नियम का पालन किया?
इतना ही नहीं, उस दौरान आलमगीर अंसारी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि उनकी कंपनी में 400 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 200 कर्मचारी प्रतिदिन 20 हजार रुपये एडवांस के तौर पर जमा करते हैं। इस हिसाब से कंपनी में रोजाना 40 लाख, महीने में 12 करोड़ और सालाना करीब 144 करोड़ रुपये सिर्फ एडवांस के रूप में जमा होते हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या इस भारी भरकम रकम पर नियमानुसार टैक्स जमा किया गया? जबकि जमीन की पूरी रकम तो रजिस्ट्री के समय अलग से ली जाती है।

अब आयकर विभाग की छापेमारी को स्थानीय लोग उन्हीं खबरों और सवालों से जोड़कर देख रहे हैं। लोगों का मानना है कि इतनी कम अवधि में अरबों की संपत्ति खड़ी करना बिना किसी गड़बड़ी के संभव नहीं है। यही कारण है कि आयकर विभाग की यह कार्रवाई इलाके में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गई है।



हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन फिलहाल रेडहिल रियल एस्टेट और उसके मालिक आलमगीर अंसारी पर आयकर विभाग की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि “तेज तरक्की” की कहानी के पीछे कई ऐसे राज छिपे हो सकते हैं, जिनका पर्दाफाश होना अभी बाकी है।
