



27 फरवरी | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
जनपद कुशीनगर में वर्षों से बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल को पुनर्जीवित करने की दिशा में अब प्रशासन ने निर्णायक तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कृषक प्रतिनिधियों, चीनी मिल प्रबंधन और गन्ना विभाग के अधिकारियों ने एकजुट होकर मिल संचालन के मुद्दे पर गंभीर मंथन किया।
बैठक में किसानों की आवाज बुलंद रही। कृषक प्रतिनिधि छोटेलाल सिंह सहित कई किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि पडरौना मिल का दोबारा संचालन क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करेगा। जवाब में जिलाधिकारी ने अब तक की प्रगति का खुलासा करते हुए बताया कि भूमि अभिलेखों की गहन जांच में लगभग 150 एकड़ भूमि पर अनियमितता सामने आई है। करीब 100 एकड़ जमीन पर वर्तमान में खेती हो रही है, जबकि लगभग 50 एकड़ भूमि पर अवैध खरीद-फरोख्त और कब्जे की पुष्टि हुई है। इस मामले में विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
किसानों ने बड़ा त्याग दिखाते हुए भरोसा दिलाया कि यदि कोई सक्षम निवेशक या प्रबंधन पक्ष मिल को दोबारा चालू करने के लिए आगे आता है, तो वे गन्ना मूल्य भुगतान से जुड़े अपने लंबित वाद माननीय उच्च न्यायालय से वापस लेने को तैयार हैं। इतना ही नहीं, किसानों ने ब्याज छोड़कर केवल मूलधन लेने पर सहमति जताई, ताकि मिल संचालन की राह में कोई कानूनी रोड़ा न रहे।
जिलाधिकारी ने संबंधित वादकारियों से शीघ्र शपथ-पत्र उपलब्ध कराने को कहा और चीनी मिल प्रतिनिधियों को सकारात्मक पहल के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिल के पुनः संचालन या नई इकाई की स्थापना से गन्ना क्षेत्रफल बढ़ेगा, किसानों की आय में इजाफा होगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
बैठक में ड्रेनों की समयबद्ध सफाई, पेराई सत्र की तैयारियों और समन्वित कार्ययोजना पर भी जोर दिया गया। जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक सख्ती और किसानों की एकजुटता क्या सच में पडरौना चीनी मिल की चिमनी से फिर धुआं उठाने में सफल होगी।
