

09 जनवरी | विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
जनपद कुशीनगर में नदियों के कायाकल्प और पर्यटन विकास को नई गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं निर्णायक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बांसी नदी, हिरण्यवती नदी तथा जनपद में संचालित विभिन्न पर्यटन विकास परियोजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट, कड़े और समयबद्ध निर्देश जारी किए गए।
बैठक में सर्वप्रथम बांसी नदी की सफाई, सौंदर्यीकरण और समग्र विकास कार्यों पर चर्चा की गई। मुख्य विकास अधिकारी से प्रगति की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि शासन स्तर से बांसी नदी के कायाकल्प हेतु एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस धनराशि का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता और निर्धारित समय सीमा में किया जाए। नदी में फैल रही जलकुंभी की गंभीर समस्या पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसका स्थायी समाधान निकालने के निर्देश दिए तथा साउथ की प्रतिष्ठित कंपनी अल्फा मर्ज से समन्वय स्थापित करने को कहा।
जिलाधिकारी ने बांसी नदी के किनारे स्थित सरकारी भूमि के समुचित उपयोग पर विशेष जोर देते हुए वहां खेल मैदान, आधुनिक कॉम्प्लेक्स, पार्क तथा मियावाकी पद्धति से सघन वृक्षारोपण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि क्षेत्र को एक आकर्षक सार्वजनिक स्थल के रूप में भी विकसित करेगी।
हिरण्यवती नदी के कार्यों की समीक्षा के दौरान अपर जिलाधिकारी से अद्यतन जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने कार्यों की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया और गति तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए। अधिशासी अधिकारी कुशीनगर द्वारा प्रस्तुत विस्तृत प्रस्तुतीकरण के आधार पर जिलाधिकारी ने हिरण्यवती नदी एवं कृषि विश्वविद्यालय से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में फरवरी माह तक मियावाकी वृक्षारोपण एवं सौंदर्यीकरण की ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
पर्यटन विकास की समीक्षा करते हुए पर्यटन अधिकारी ने बताया कि ग्राम सभा सपही खुर्द (उजरारनाथ) स्थित शंकर जी मंदिर, सिकटिया स्थित प्राचीन श्री राम-जानकी मंदिर, विकास खंड नेबुआ नौरंगिया के ग्राम मडार बिंदवालिया स्थित कोट माता भुनेश्वरी मंदिर तथा ग्राम पंचायत गम्भीरपुर स्थित गुरु गोरक्षपीठ राम-जानकी मंदिर के विकास हेतु प्रत्येक परियोजना के लिए एक-एक करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और विकास कार्यों को तय समय सीमा में धरातल पर उतारना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा, डीसी मनरेगा राकेश, पर्यटन अधिकारी प्राण रंजन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों से यह स्पष्ट संदेश गया कि अब विकास कार्यों में ढिलाई नहीं, बल्कि गति, गुणवत्ता और जवाबदेही ही प्रशासन की पहचान होगी।





