
कुशीनगर। उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के निर्देशों के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में हाल ही में दो कर्मचारियों की संबद्धता समाप्त कर उन्हें उनके मूल पद पर भेजा गया।
संयुक्त शिक्षा निदेशक, सप्तम मंडल गोरखपुर ने रवींद्र किशोर यादव (लेखा परीक्षक) और अखिलेश चन्द्र मौर्य (कनिष्ठ सहायक) की संबद्धता खत्म की। इस कार्रवाई से आदेश का पालन हुआ, लेकिन इसी बीच वरिष्ठ लिपिक सुभाष यादव की स्थिति बरकरार रही।
शासन ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी कर्मचारी को उनके मूल पद के अलावा संबद्ध नहीं रखा जाएगा, और पूर्व में जारी आदेशों को तुरंत निरस्त किया जाए।
डीआईओएस कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक का पद स्वीकृत नहीं है, फिर भी सुभाष यादव वर्षों से वही संबद्ध रहते आए हैं। उनकी बची हुई संबद्धता प्रशासनिक गलियारों में चर्चा और सवालों का विषय बन गई है।
शिक्षक संघ और कर्मचारियों का कहना है कि तीन में से दो को हटाकर एक को बचाना आदेश का चयनात्मक पालन है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला जेडी कार्यालय की रसूख और प्रशासनिक सेटिंग का संकेत देता है। अब दस दिनों में शासन को भेजी जाने वाली अनुपालन रिपोर्ट में यह स्पष्ट होगा कि आदेश का पालन कितना निष्पक्ष रहा।
कुशीनगर से लेकर गोरखपुर मंडल तक इस विवाद ने शिक्षा प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल उठा दिए हैं।
