
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर | विशेष संवाददाता
माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर कुशीनगर जनपद के खड्डा विकासखंड अंतर्गत नारायणीधाम-शालिकपुरम, महादेवा में “मां नारायणी सामाजिक कुम्भ-संत समागम” का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। धार्मिक आस्था, सनातन चेतना और सामाजिक एकता का यह महाकुम्भीय समागम क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद जिला टोली-पडरौना की सक्रिय सहभागिता रही, जिससे आयोजन को और अधिक संगठित एवं प्रभावशाली स्वरूप प्राप्त हुआ।
समागम में उत्तर प्रदेश, बिहार एवं नेपाल से पधारे संत-महात्माओं, महामंडलेश्वरों एवं धर्माचार्यों ने सनातन धर्म की महत्ता, उसकी सांस्कृतिक विरासत तथा वर्तमान समय में धर्म-संरक्षण की आवश्यकता पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। संतों ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से समाज को धर्म, संस्कार, राष्ट्रभाव और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। नारायणीधाम परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया।
कार्यक्रम के आयोजक राजर्षि रामनयन दास जी रामायणी के नेतृत्व में स्थानीय सनातनी बंधुओं ने समागम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजक मंडल द्वारा संतों का विधिवत स्वागत, पूजन एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में धार्मिक चेतना जागृत होती है तथा युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
समागम के दौरान प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी व्यवस्था सराहनीय रही। शांति, सुरक्षा एवं अनुशासन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, जिससे स्थानीय प्रशासन एवं आयोजन समिति के समन्वय की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि सनातन धर्म के प्रति जनमानस की आस्था और विश्वास आज भी पूरी दृढ़ता के साथ विद्यमान है।
कुल मिलाकर, मां नारायणी सामाजिक कुम्भ-संत समागम न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों के संरक्षण का सशक्त संदेश देकर गया, जिसे क्षेत्रवासी लंबे समय तक स्मरण रखेंगे।






