
2.14 लाख से अधिक विदेशी, वर्ष 2017 की तुलना में कई गुना बढ़त
यूपी टूरिज्म की रणनीति, वैश्विक मंचों पर दमदार उपस्थिति और ‘बोधि यात्रा’ का मिला शानदार परिणाम
लखनऊ/कुशीनगर, 20 नवंबर 2025—
उत्तर प्रदेश का पर्यटन आज अपने स्वर्णिम काल की ओर बढ़ रहा है। खासकर बौद्ध पर्यटन के मामले में प्रदेश ने विश्व पर्यटन के नक्शे पर अपनी ऐसी छाप छोड़ी है, जिसकी गूंज एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक सुनाई दे रही है। वैश्विक बौद्ध सर्किट के केंद्र के रूप में उभर रहा कुशीनगर अब सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
जनवरी से अक्टूबर 2025 तक जारी आधिकारिक आंकड़े इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं—इस अवधि में अकेले कुशीनगर में 19,90,931 पर्यटक पहुंचे। इनमें से 2,14,684 विदेशी थे, जो यह दर्शाता है कि कुशीनगर आज दुनिया का दिल जीतने में पूरी तरह सफल हो रहा है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर आज भी 2600 वर्ष पुरानी आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ दुनिया को आकर्षित कर रही है। देश-दुनिया से लोगों का बढ़ता रुझान उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक शक्ति, पर्यटन नीति और बौद्ध सर्किट को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है।”
कुशीनगर: दुनिया के बौद्ध धर्मावलंबियों का सबसे बड़ा आस्था स्थल
कुशीनगर बौद्ध धर्म के चार प्रमुख पवित्र स्थलों में से एक है, जहाँ भगवान बुद्ध ने अंतिम उपदेश ‘अत्त दीपो भव’ (अपने दीपक स्वयं बनो) दिया था।
यह वही भूमि है जहाँ उन्होंने मानवता को आत्मज्ञान, करुणा और सत्य का अद्वितीय संदेश सौंपा था।
यह पवित्रता, इतिहास और आध्यात्मिक ऊर्जा ही है जो आज दुनिया भर के लाखों लोगों को यहां खींच लाती है। कुशीनगर की लेटी हुई भगवान बुद्ध की मूर्ति विश्वभर में अनन्य मानी जाती है और हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां नमन करने आते हैं।
10 महीने में 20 लाख के करीब पर्यटक: कुशीनगर में दिखी अद्भुत रौनक
पर्यटन मंत्री ने बताया कि 2025 में जनवरी से अक्टूबर तक लगभग 20 लाख पर्यटक कुशीनगर पहुंचे।
इनमें—
17,76,247 घरेलू पर्यटक
2,14,684 विदेशी पर्यटक
शामिल रहे।
पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि वर्षांत तक यह आंकड़ा 25 लाख को पार कर सकता है, जो कुशीनगर के लिए ऐतिहासिक सिद्ध होगा।
विदेशी पर्यटकों में जापान, थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, कंबोडिया, सिंगापुर, म्यांमार और नेपाल जैसे देशों के श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक रही।
विदेशी पर्यटकों में कई गुना बढ़ोतरी—2017 से 2025 तक का सफर अद्भुत
2024 में कुशीनगर में कुल 22,42,913 पर्यटक आए थे, जिनमें 2,51,251 विदेशी थे।
जबकि वर्ष 2017 में कुल पर्यटक संख्या केवल 9,37,981 थी, जिनमें सिर्फ 76,221 विदेशी शामिल थे।
यह बढ़ोतरी लगभग तीन गुना से अधिक है, जो कुशीनगर को वैश्विक बौद्ध पर्यटन के शीर्ष गंतव्यों की सूची में लाकर खड़ा कर रही है।
मंत्री जयवीर सिंह कहते हैं—
“केंद्र व राज्य सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप कुशीनगर अब बौद्ध सर्किट का विश्व का सबसे पसंदीदा पड़ाव बन चुका है। श्रीलंका, जापान और वियतनाम से आने वाले समूहों में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिल रही है।”
पिपरहवा अवशेष की भारत वापसी से बढ़ी आस्था और उत्साह
सिद्धार्थनगर स्थित पिपरहवा से मिले भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष 127 वर्षों बाद भारत लौटे।
यह ऐतिहासिक क्षण दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का पर्व साबित हुआ।
इसके बाद से ,कुशीनगर,श्रावस्ती,संकिसा
लुंबिनी मार्ग,और पूरे बौद्ध सर्किट में श्रद्धालुओं की संख्या दोगुनी गति से बढ़ी है।
पर्यटन मंत्री ने कहा,
“पिपरहवा अवशेषों की वापसी ने भारत में बौद्ध पर्यटन को नई दिशा दी है। हजारों विदेशी श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए विशेष रूप से यात्रा कर रहे हैं।”
विश्व के प्रमुख मंचों पर यूपी टूरिज्म की धमक
पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश पर्यटन ने कई वैश्विक मंचों पर अपनी शानदार प्रस्तुति दी है—
PATA (Pacific Asia Travel Association)
JATA (Japan Tourism Expo)
IFTM Top Resa
World Travel Market London (WTM)
इन सभी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में यूपी ने अपने बौद्ध सर्किट, धार्मिक-आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहरों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।
इससे विश्वभर के टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों और पर्यटन विशेषज्ञों की नजरों में “बौद्ध सर्किट ऑफ इंडिया—उत्तर प्रदेश” एक प्रमुख आकर्षण बन गया है।
‘बोधि यात्रा’ पहल—ग्लोबल टूरिज्म में यूपी का ब्रांड बनकर उभरा
यूपी पर्यटन की खास पहल ‘बोधि यात्रा’ ने विश्व के सामने एक जुड़ा हुआ, सुरक्षित, आध्यात्मिक और अत्यंत समृद्ध बौद्ध मार्ग पेश किया है।
जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम जैसे देशों की बड़ी संख्या में मंडल और भिक्षु इस यात्रा में भाग लेते हैं।
इस यात्रा के माध्यम से— कुशीनगर, श्रावस्ती,संकिसा,कपिलवस्तु,सारनाथ ,लुंबिनी (नेपाल)
जैसे पवित्र स्थलों को एक ही धार्मिक श्रृंखला के रूप में जोड़ा गया है।
यह भारत की धार्मिक-आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक सद्भाव व शांति का संदेश देने वाली ऐतिहासिक योजना साबित हो रही है।
बौद्ध बहुल देशों के लिए विशेष फैम ट्रिप—पर्यटन को मिला नया मुकाम
यूपी टूरिज्म द्वारा नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे फैम ट्रिप (Familiarization Trip) ने कुशीनगर की पहचान को कई गुना अधिक स्थापित कर दिया है।
इनमें शामिल हैं—
थाईलैंड ,वियतनाम ,श्रीलंका ,जापान,इंडोनेशिया
भूटान, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार ,सिंगापुर
से आने वाले टूर ऑपरेटर, मीडिया प्रतिनिधि और भिक्षु।
इन यात्राओं के दौरान वे कुशीनगर, श्रावस्ती और अन्य बौद्ध स्थलों की गहराई से जानकारी प्राप्त करते हैं, जिसे वे अपने देश में प्रचारित करते हैं।
परिणामस्वरूप यूपी के बौद्ध सर्किट की ब्रांड वैल्यू लगातार बढ़ती जा रही है।
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट—पर्यटन को मिला आसमान
कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन ने पर्यटकों की आवाजाही को सीधे बढ़ावा दिया है।
श्रीलंका, जापान, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड से आने वाले चार्टर्ड विमानों की संख्या में पिछले एक वर्ष में उल्लेखनीय उछाल आया है।
स्थानीय होटल उद्योग, रेस्टोरेंट, टूर कंपनियां और परिवहन सेवाएं भी इस वृद्धि से लाभान्वित हो रही हैं, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
आध्यात्मिकता, इतिहास, पर्यटन और अर्थव्यवस्था—चारों दिशाओं में बढ़ता कुशीनगर
आज कुशीनगर सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक केंद्र बौद्ध धर्म की आध्यात्मिक राजधानी
एशियाई देशों के लिए शांति व सद्भाव का प्रतीक पूर्वी यूपी की आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है।
स्थानीय व्यापारियों, गाइड्स, होटल कर्मियों, कैब सेवाओं और हस्तशिल्प उद्योग सभी को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
यूपी पर्यटन के सुनियोजित प्रयास से बदल गई तस्वीर
सरकार के प्रयासों में शामिल हैं—
बौद्ध सर्किट पर सड़कों का चौड़ीकरण
कुशीनगर एयरपोर्ट जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर
लाइट एंड साउंड शो
नए व्यू पॉइंट
अंतरराष्ट्रीय मानकों की सुविधाएं
साफ-सफाई और गाइड ट्रेनिंग
इन सबने कुशीनगर को विश्वस्तरीय गंतव्य बनने में मदद की है।
दुनिया का बौद्ध हृदय बन रहा है कुशीनगर
लगभग 20 लाख पर्यटकों की संख्या महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण है।
कुशीनगर ने दुनिया को यह संदेश एक बार फिर दे दिया है कि
जहाँ बुद्ध ने जीवन का सत्य बताया था—
वह भूमि आज भी मानवता, शांति और आस्था की सबसे बड़ी यात्रा का नेतृत्व कर रही है।
वर्ष 2025 पर्यटन के लिए ऐतिहासिक बनता दिख रहा है और संभावना है कि आने वाले वर्षों में कुशीनगर दुनिया का सबसे बड़ा ‘बौद्ध तीर्थ केंद्र’ बनकर अपने स्वर्ण युग में प्रवेश करेगा।









