
कुशीनगर, 26 अक्टूबर 2025: बहादुरपुर पुलिस चौकी के पास हुई दर्दनाक बस दुर्घटना ने प्रशासन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन दिन पुराना यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें पीड़ित यात्री खुद बता रहे हैं कि हादसे की जड़ें बस चालक और स्थानीय ढाबा मालिक की लापरवाही और एआरटीओ कुशीनगर की मिलीभगत में छिपी हैं।
पीड़ित यात्री ने आरोप लगाया कि हादसे वाले मार्ग पर स्थित ढाबा बस चालकों की अवैध गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। उनके अनुसार, यह ढाबा प्रति बस एआरटीओ कुशीनगर से मासिक पांच हजार रुपये इंट्री लेकर बस संचालित करवाता है। यात्री का साफ कहना है, “यहीं से सब सेटिंग होती है। ड्राइवर यहाँ रुकते हैं, नशा करते हैं और लापरवाही से बस चलाते हैं। समय पर गंतव्य तक पहुंचना ही उनकी प्राथमिकता है, सुरक्षा नहीं।”
इस वीडियो ने सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं: क्या एआरटीओ कुशीनगर और उनकी टीम ने लोक लज्जा और लोक मर्यादा को पूरी तरह खो दिया है? क्या उन्हें अब सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का कोई भय बचा ही नहीं? जनता का विश्वास हिल चुका है और सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा प्रशासन की उदासीनता पर फूट पड़ा है।
स्थानीय लोग और यात्री मांग कर रहे हैं कि न केवल ढाबा मालिक और बस संचालक, बल्कि एआरटीओ और उनकी टीम के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए। सिर्फ मृतकों का आंकड़ा बढ़ता रहेगा, अगर प्रशासन ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई नहीं करता।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक मिलीभगत का परिणाम है। नशे में धुत ड्राइवर, अवैध बस संचालक और उनका समर्थन करने वाले अधिकारी—सारा नेटवर्क जनता की जान के साथ खेल रहा है। कुशीनगर के लोग सवाल कर रहे हैं: आखिर कब जागेगी यह प्रशासनिक मशीनरी?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद भी कार्रवाई की देरी ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। जनता की मांग है कि इस मामले में तेज, सख्त और सार्वजनिक कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की श्रृंखला रोकी जा सके।
कुशीनगर अब सिर्फ हादसों का शहर नहीं, बल्कि प्रशासन की उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। अगर सरकार और जिला प्रशासन ने अब तक आंखें बंद रखी तो यह सवाल हमेशा जनता के जेहन में गूंजता रहेगा: “क्या हमारे अधिकार और सुरक्षा की कोई कीमत नहीं?”
अब जनता की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या कार्रवाई होगी या सिर्फ बयानबाजी जारी रहेगी?
