

कुशीनगर। जिले के दशहरा मेले में रावण दहन से पहले का सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए शर्मनाक बन गया। मंच पर अश्लील गानों पर ठुमके लगाए जा रहे थे, जैसे रामायण की जगह कोई फिल्मी डांस शो चल रहा हो।
स्थानीय लोगों ने बताया कि “राम तेरी गंगा मैली” जैसी गानों पर जोरदार ठुमके, बच्चों और बुजुर्गों के लिए असहज और अपमानजनक दृश्य बन गए। कई श्रद्धालु कहते हैं, “यह दशहरा है या ‘डांस इंडिया डांस’ का लाइव शो?”
पुलिस और प्रशासन मौके पर मौजूद थे, लेकिन उनकी सक्रियता केवल कैमरों के सामने रिकॉर्डिंग तक ही सीमित रही। न रोक-थाम, न चेतावनी। आयोजकों की लापरवाही और प्रशासनिक निष्क्रियता इस घटना की सबसे बड़ी वजह बन गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि दशहरा केवल रावण दहन और धर्म की विजय का पर्व है, न कि अश्लील मनोरंजन का मंच। ऐसे आयोजनों से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है और समाज में अनुचित संदेश फैलता है।
स्थानीय जनता ने बार-बार अधिकारियों से शिकायतें की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि आयोजकों और प्रशासन ने पारंपरिक मूल्यों और मर्यादा का पालन किया होता, तो मेले का माहौल सुसंस्कृत और सुरक्षित रहता।
इस घटना ने प्रशासन और आयोजकों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब कुशीनगर के नागरिक सोच रहे हैं कि क्या यह दशहरा है या केवल मनोरंजन का रंगीन तमाशा।
संदेश साफ है: सांस्कृतिक आयोजनों में अनुशासन, पारंपरिक मर्यादा और प्रशासनिक सतर्कता जरूरी है, वरना त्योहार का सार और सामाजिक सद्भाव दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
