


विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के तमकुही राज तहसील क्षेत्र से एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठे हैं। मौजा भुआल पट्टी निवासी धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने मा० उच्च न्यायालय, इलाहाबाद (प्रयागराज) द्वारा पारित आदेश दिनांक 26.04.2024, वाद संख्या Writ–C No. 5683/2024 के अनुपालन में विलंब का आरोप लगाते हुए कड़ा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। प्रार्थी का कहना है कि न्यायालय ने संबंधित राजस्व/प्रशासनिक प्राधिकारियों को पुनर्स्थापन प्रार्थना-पत्र के निष्पक्ष, विधिसम्मत एवं समयबद्ध निस्तारण तथा निर्णय के अनुरूप राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टि/संशोधन सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, किन्तु आदेश के लगभग दो वर्ष बाद भी जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई परिलक्षित नहीं हुई।
प्रतिवेदन में विलंब को न्यायालयीय आदेश की भावना के प्रतिकूल बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 141 एवं 144 की मंशा का उल्लेख किया गया है। साथ ही Contempt of Courts Act, 1971 के प्रावधानों के तहत अवहेलना को विचारणीय विषय बताया गया है। प्रार्थी ने यह भी रेखांकित किया कि U.P. Zamindari Abolition & Land Reforms Act, 1950 तथा U.P. Revenue Code, 2006 के अनुरूप समयबद्ध निस्तारण एवं अभिलेखीय शुद्धता प्रशासन का वैधानिक दायित्व है, और निष्क्रियता से उनके विधिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर इस प्रकरण को लेकर चर्चाएं तेज हैं। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अनुपालन में देरी होती है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। लोगों ने पारदर्शिता, समयबद्ध कार्रवाई और उत्तरदायित्व निर्धारण की मांग उठाई है।
धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल, अक्षरशः एवं समयबद्ध अनुपालन हेतु निर्देशित करने, विलंब/लापरवाही के कारणों की समीक्षा करने तथा आवश्यकतानुसार कठोर प्रशासनिक/अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने आदेश के अनुपालन की अद्यतन स्थिति से अवगत कराने का भी आग्रह किया है, अन्यथा विधि अनुसार सक्षम न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी दी है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाता है और न्यायालयीय निर्देशों के अनुपालन को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
