

29 दिसंबर, विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
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कलेक्ट्रेट सभागार आज प्रशासनिक सख़्ती और जिम्मेदारी का साक्षी बना, जब अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा की अध्यक्षता में एसडीके (सड़क सुरक्षा) समिति की बैठक पूरे तेवर के साथ सम्पन्न हुई। सड़क सुरक्षा को लेकर ज़िले में लगातार हो रही लापरवाही और हादसों की बढ़ती संभावनाओं पर विराम लगाने के लिए एडीएम ने विभागों को एक-एक कर ऐसे निर्देश थमाए, जिनके बाद अधिकारी मानो हर मोर्चे पर सतर्कता की डोर कसने को मजबूर दिखाई दिए।
बैठक में लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग, चिकित्सा विभाग, एनएचएआई, समेत तमाम विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
लोक निर्माण विभाग की तरफ से सहायक अभियंता मुकेश वर्मा व राहुल सोनी, ARTO प्रवर्तन मो. अज़ीम, शिक्षा विभाग के अधिकारी, डिप्टी सीएमओ डॉ. आर.डी. कुशवाहा, तथा एनएचएआई से चिन्मय दुबे ने उपस्थिति दर्ज कराई।
🔥 परिवहन विभाग पर करारी चोट—सड़क सुरक्षा माह पर ‘एक्शन नहीं तो जवाब नहीं’
एडीएम ने परिवहन विभाग को स्पष्ट आदेश दिए—“वाहनों की चेकिंग निरंतर हो, सघन हो, और दिखनी चाहिए!”
साथ ही जनवरी 2026 को “सड़क सुरक्षा माह” के रूप में धमाकेदार प्रचार-प्रसार के साथ मनाने का आदेश। सड़क पर बिना फिटनेस के दौड़ते वाहन और कागजों में सुरक्षित कहलाने वाले वाहन—दोनों पर नकेल कसने की मजबूत चेतावनी दी गई।
🚌 स्कूल क्षेत्र में लापरवाही शून्य—बच्चों की सुरक्षा पर समझौता नहीं
पीडब्ल्यूडी को निर्देश—हाटा क्षेत्र सहित विद्यालयों के आसपास तुरंत सुधारात्मक कार्य, गति नियंत्रक संकेत, चेतावनी बोर्ड, और मार्ग सुरक्षा के सभी इंतज़ाम “डेथ ज़ोन से सेफ्टी ज़ोन” में तब्दील हों।
शिक्षा विभाग को निर्देश—हर स्कूल की प्रार्थना सभा में सड़क सुरक्षा जागरूकता अनिवार्य, स्कूल वाहनों की फिटनेस कड़ाई से जांची जाए। “अनफिट वाहन? तो स्कूल में प्रवेश वर्जित!”
साथ ही बच्चों को छोड़ने आने वाले अभिभावकों के लिए हेलमेट अनिवार्य—नियम तोड़ने पर कोई राहत नहीं!
🚑 चिकित्सा विभाग को भी अलर्ट—ड्राइवरों की आंखों की जांच अनिवार्य
चालकों-परिचालकों के नियमित नेत्र परीक्षण शिविर—ताकि सड़क पर ड्राइविंग के नाम पर कोई जोखिम न बचे।
🚜 एनएचएआई पर फोकस—गन्ना लदी ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर टेप अनिवार्य
एडीएम ने साफ कहा—“राजमार्ग पर अंधेरे में चलती ट्रॉलियां चलती मौत बन चुकी हैं—अब गलती नहीं, जिम्मेदारी निभाएं।”
अंत में एडीएम वैभव मिश्रा की दो-टूक चेतावनी:
“सामूहिक समन्वय ही हादसों पर लगाम लगाएगा। विभाग अगर ढीला दिखा—तो अगली बैठक में सिर्फ रिपोर्ट नहीं, जवाबदेही तय होगी!”
ज़िले में सड़क सुरक्षा की इस नई मुहिम से अब उम्मीद है कि सड़कें सुरक्षित होंगी, हादसे कम होंगे, और लापरवाही पर ताले लगेंगे।
— विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर


