


विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
कुशीनगर।
तमकुहीराज कस्बे में मंगलवार दोपहर ऐसा दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। मस्जिद के पास मजार की बगल में बने मोबाइल टावर पर अचानक एक युवक चढ़ गया। चंद मिनटों में भीड़ उमड़ पड़ी, सड़कें जाम जैसी स्थिति में पहुंच गईं और लोग दहशत में यह समझने की कोशिश में लग गए कि आखिर युवक इतनी ऊंचाई पर क्यों चढ़ गया।
टावर पर लटकते जान जोखिम में डालने वाला यह युवक कृष्णा पुत्र मनोज बैठा, निवासी अहिरौली मिश्र, थाना सेवरही का बताया गया। नीचे खड़ी पुलिस और जनता की ओर से बार-बार समझाने पर युवक ने चिल्लाकर कहा कि उसने प्रेम विवाह गोड जाति की लड़की से किया है, जबकि वह खुद धोबी जाति का है। आरोप लगाते हुए वह बार-बार चिल्ला रहा था कि उसकी पत्नी को जाति के नाम पर उसे सौंपा नहीं जा रहा और ससुराल पक्ष उसकी पत्नी की दूसरी शादी कराने की साजिश रच रहा है।
युवक का कहना था कि वह दो महीनों से तमकुहीराज कस्बे में अपनी पत्नी को ढूंढ रहा है, दर-दर भटक रहा है, पर कोई उसकी सुनने को तैयार नहीं। मानसिक रूप से टूट चुका कृष्णा आखिरकार इतना परेशान हो गया कि उसने मोबाइल टावर पर चढ़कर अपनी जान दांव पर लगा दी। उसकी आवाज़ में दर्द भी था और गुस्सा भी—
“मेरी पत्नी को बुला दो… वरना मैं नीचे नहीं उतरूंगा!”
घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ उप निरीक्षक दिनेश साहनी, चौकी प्रभारी महेश मिश्र व भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। ध्वनि विस्तारक यंत्र से लगातार उसे शांत कराने की कोशिश की गई, लेकिन वह अड़ गया। भीड़ बढ़ती जा रही थी और स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी।
इसी बीच तमकुहीराज की उप जिलाधिकारी आकांक्षा मिश्र मौके पर पहुंचीं। भीड़ को नियंत्रित किया गया और एसडीएम स्वयं टावर के बिलकुल पास जाकर युवक से बात करने लगीं। उन्होंने धैर्य के साथ युवक को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उसकी पत्नी को खोजेगा और पूरी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार युवक का मन थोड़ा पसीजा और प्रशासन के आश्वासन पर वह धीरे-धीरे नीचे उतर आया।
युवक को सकुशल नीचे उतारकर पुलिस उसे सीधे उप जिलाधिकारी कार्यालय ले गई, जहां एसडीएम आकांक्षा मिश्र ने उसे विस्तार से समझाया। उन्होंने तत्काल पुलिस को निर्देश जारी किए—
“पत्नी की तलाश अविलंब की जाए और जो भी आवश्यक कार्रवाई हो, वह तुरंत की जाए।”
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने पूरे कस्बे में हलचल मचा दी। लोग दांतों तले उंगली दबाते रह गए कि कैसे एक युवक सामाजिक दबाव, जातिगत भेदभाव और मानसिक तनाव में इस हद तक पहुंच गया कि अपनी जान को खतरे में डालने वाला कदम उठा लिया।
फिलहाल, समय रहते प्रशासन की तत्परता और सूझबूझ से एक बड़ी दुर्घटना टल गई, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया कि समाज की संकीर्ण सोच कई बार युवाओं को खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा करती है।
