

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
खड्डा/कुशीनगर।
माघ मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर छितौनी–बगहा रेल पुल के समीप आगामी 16, 17 एवं 18 जनवरी को आयोजित होने जा रहे नवम वर्ष के “मां नारायणी सामाजिक कुंभ” की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ हो गया है। कुंभ स्थल पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ धर्म ध्वजा की स्थापना एवं भूमि पूजन कर आयोजन की आध्यात्मिक आधारशिला रखी गई।
पूरे विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार एवं भक्तिमय वातावरण के बीच यह पावन अनुष्ठान पंडित वीरेंद्र तिवारी द्वारा संपन्न कराया गया। मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था से कुंभ स्थल पूरी तरह सनातन ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
इस अवसर पर आयोजन समिति के संरक्षक एवं बगही धाम के पीठाधीश्वर विशंभर दास महाराज ने कहा कि मां नारायणी सामाजिक कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में पिरोने वाला सांस्कृतिक महासंगम है। यह कुंभ सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और पारंपरिक मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। धर्म ध्वजा की स्थापना के साथ ही कुंभ आयोजन का शुभारंभ विधिवत रूप से हो चुका है, जिसमें हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और मां नारायणी के अनन्य भक्तों के पहुंचने की संभावना है।
भूमि पूजन के दौरान उपस्थित संत-महात्माओं एवं आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कुंभ के शांतिपूर्ण, भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन की कामना की।
आयोजन समिति के संरक्षक पथलेश्वरनाथ के महंत डॉ. सत्येंद्र गिरी महाराज ने बताया कि आगामी दिनों में कुंभ स्थल पर भव्य मंच निर्माण, विशाल पंडाल, श्रद्धालुओं की सुविधा, भंडारा, सुरक्षा, स्वच्छता एवं यातायात व्यवस्था को लेकर कार्य युद्धस्तर पर किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि इस विशाल आयोजन को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इस शुभ अवसर पर अंकुर दास, शैलेश पांडेय, अनिल दास, संतोष दास, विनोद दुबे, रविंद्र तिवारी, पिंटू निषाद, उपेंद्र उपाध्याय, सुनील यादव, प्रभाकर पांडेय, विकास सिंह, करण यादव, वीरेंद्र निषाद एवं मनोज शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर इस पावन आयोजन को क्षेत्रीय आस्था, संस्कृति और सामाजिक चेतना का महापर्व मानते हुए प्रशासन से अपेक्षा करता है कि जनसुविधा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए, ताकि मां नारायणी सामाजिक कुंभ अपनी दिव्यता और भव्यता के साथ इतिहास रच सके।




