




विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के विकास खण्ड दुदही में एक भव्य, चर्चित और कहीं न कहीं सवालों के घेरे में खड़ा करने वाला आयोजन उस समय देखने को मिला, जब 22 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2026 तक दुदही ब्लॉक में कार्यरत रहे अधिकारी मजरुल हक के कार्यकाल को यादगार बनाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सहायक खण्ड विकास अधिकारी दुदही के सभागार में बड़े ही प्रमुखता और प्रशासनिक तामझाम के साथ संपन्न हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में खण्ड विकास अधिकारी कमलेश कुमार राय की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में दुदही विकास खण्ड के कर्मचारी, सफाई कर्मचारी, ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधियों की भारी भीड़ उमड़ी। मंच सजा, मालाएं चढ़ीं, तालियों की गूंज हुई और भाषणों में उपलब्धियों की झड़ी लगा दी गई। ऐसा माहौल बना मानो विकास की गंगा यहीं से बह निकली हो। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मजरुल हक के कार्यकाल को “स्वर्णिम दौर” बताते हुए जमकर प्रशंसा की और उनके कार्यों को अनुकरणीय करार दिया।
लेकिन इस पूरे आयोजन के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता दिखा—क्या वाकई जमीनी हकीकत उतनी ही चमकदार है, जितनी मंच से दिखाई गई? जहां एक ओर प्रशंसा के पुल बांधे गए, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज रही कि विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या रही और क्या सभी योजनाएं पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतरीं?
मुख्य अतिथि बीडीओ कमलेश कुमार राय ने अपने संबोधन में मजरुल हक के योगदान को सराहते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को गति मिली और टीम भावना के साथ कार्य हुआ। उन्होंने कर्मचारियों को संदेश दिया कि जनसेवा सर्वोपरि है और इसी भावना के साथ कार्य करते रहना ही प्रशासन की असली पहचान है।
कार्यक्रम में ग्राम प्रधानों और प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखते हुए सहयोग, समन्वय और विकास की प्रतिबद्धता को दोहराया। हालांकि, कुछ लोगों के बीच यह भी चर्चा रही कि इस तरह के भव्य आयोजनों से ज्यादा जरूरी है कि विकास कार्यों की वास्तविक समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
कुल मिलाकर यह आयोजन केवल एक सम्मान या विदाई समारोह भर नहीं रहा, बल्कि इसने प्रशासनिक कार्यशैली, प्राथमिकताओं और जमीनी सच्चाई पर बहस छेड़ दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि दुदही विकास खण्ड में आने वाले समय में विकास के दावे सच साबित होते हैं या फिर यह सब केवल मंचीय भाषणों और औपचारिकताओं तक ही सीमित रह जाता है।
